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ब्रिटेन के इतिहास में सबसे बुजुर्ग राजा का राजतिलक, 2600 करोड़ हुए खर्च

70 साल के लंबे इंतजार के बाद ब्रिटेन के राजा बने किंग चार्ल्स तृतीय की आखिरकार 74 साल की उम्र में 6 मई को ताजपोशी हो गई। शाही गिरजाघर वेस्टमिन्सटर एबे में चर्च की घंटियों और बिगुलों की खास धुनों और तोप के गोलों की आवाजों के बीच किंग चार्ल्स के सिर पर खालिस सोने से बना सेंट एडवर्ड क्राउन रखा गया।

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70 साल के लंबे इंतजार के बाद ब्रिटेन के राजा बने किंग चार्ल्स तृतीय की आखिरकार 74 साल की उम्र में 6 मई को ताजपोशी हो गई। शाही गिरजाघर वेस्टमिन्सटर एबे में चर्च की घंटियों और बिगुलों की खास धुनों और तोप के गोलों की आवाजों के बीच किंग चार्ल्स के सिर पर खालिस सोने से बना सेंट एडवर्ड क्राउन रखा गया। 70 साल पहले चार साल की उम्र में किंग चार्ल्स ने अपनी मां को ब्रिटेन की रानी बनते देखा था। ब्रिटेन के राजसिंहासन पर 70 साल तक रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने राज किया।
पिछले साल उनकी मौत के बाद किंग चार्ल्स को यह गद्दी मिली। इस लिहाज से 1937 के बाद पहली बार ब्रिटेन को राजा मिला है। किंग चार्ल्स का राजतिलक ब्रिटेन के इतिहास में सबसे बुजुर्ग राजा की ताजपोशी है। उनसे पहले 1830 में विलियम चतुर्थ सबसे अधिक उम्र में ब्रिटेन के राजा बने थे। विलियम चतुर्थ की उम्र तब 64 साल 208 दिन थी। किंग चार्ल्स 2022 में जब राजा बने तब उनकी उम्र 73 साल 298 दिन थी।

पहली बार हुआ इतना कुछ
ब्रिटेन का राजा वहां की सारी चर्चों का सर्वोच्च गवर्नर भी होता है इसलिए ताजपोशी हमेशा से चर्च में होती आयी है। 70 साल बाद हुई ये ताजपोशी कई मायनों में अभूतपूर्व है। पहली बार इस दौरान चर्च में महिला बिशप भी मौजूद थीं। प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के रूप में पहली बार एक भारतीय मूल के और हिंदू नेता ने इस मौके पर बाइबिल की कुछ पंक्तियों को पढ़ने की रिवायत भी पूरी की।

40वीं ताजपोशी
लंदन के ऐतिहासिक गिरजाघर वेस्टमिंस्टर एबी में किंग चार्ल्स समेत अब तक ब्रिटेन के 40 राजा- रानियों की ताजपोशी की जा चुकी है। ब्रिटेन का राजा वहां की सारी चर्चों का सर्वोच्च गवर्नर भी होता है इसलिए ताजपोशी हमेशा से चर्च में होती आयी है। 70 साल बाद हुई ये ताजपोशी कई मायनों में अभूतपूर्व है। एक ताजपोशी से दूसरी के बीच इतने सालों का अंतर कभी नहीं रहा। क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने ब्रिटेन पर कुल 70 साल 214 दिन तक शासन किया। किंग चार्ल्स को अपनी मां के मुकाबले ज्यादा धार्मिक और जातीय विविधता के साथ ही कमजोर ब्रिटेन मिला है।

सेवा लेने नहीं, सेवा करने आयाः किंग चार्ल्स
राज्याभिषेक के बाद किंग चार्ल्स तृतीय ने कहा कि मैं यहां सेवा लेने नहीं सेवा करने आया हूं। इस दौरान आर्चबिशप ऑफ कैंटबरी ने इंग्लैंड में अलग-अलग धर्मों के लोगों की मौजूदगी पर बात करते हुए कहा कि चर्च ऑफ इंग्लैंड एक ऐसा माहौल बनाना जारी रखेगा जहां हर धर्म के लोग स्वतंत्रतापूर्वक रह सकें। शपथ के बाद आर्चबिशप ने किंग चार्ल्स तृतीय से पूछा कि क्या वह अपने शासनकाल के दौरान कानून और चर्च ऑफ इंग्लैंड को बनाए रखेंगे। किंग ने होली गॉस्पेल पर हाथ रखकर अपनी सहमति देंगे।

राजतिलक में पहुंचीं दुनिया भर की हस्तियां

किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक समारोह में शिरकत करने दुनियाभर की 2200 से अधिक हस्तियों को आमंत्रित किया गया था। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमरीका की फर्स्ट लेडी जिल बाइडन भी मौजूद रहीं। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी यहां पहुंचे हैं। ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक देश के पूर्व सात नेताओं के साथ यहां पहुंचे हैं। अन्य देशों के राजपरिवारों के सदस्य जैसे स्पेन के किंग फिलिप VI, मोनाको के प्रिंस अल्बर्ट, किंग अब्दुल्लाह दि्वतीय और जॉर्डन के क्वीन रानिया भी इस दौरान मौजूद रहीं।

कैमिला ने नहीं पहना कोहिनूर हीरे वाला ताज
ताजपोशी के दौरान महारानी कैमिला को महारानी मैरी का मुकुट पहनाया गया। इस मुकुट को इस ख़ास मौक़े पर इस्तेमाल करने के लिए टावर ऑफ लंदन से निकालकर महारानी कैमिला के सिर के हिसाब से ढाला गया। कैमिला ने वो कोहिनूर हीरे से सजा वो मुकुट नहीं पहना जो महारानी एलिजाबेथ के सिर की शोभा हुआ करता था। बकिंघम पैलेस ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ताजपोशी के कार्यक्रम में कोहिनूर हीरा शामिल नहीं होगा।

भारत से रहा है खास लगाव
प्रिंस के रूप में चार्ल्स तृतीय कई बार भारत आ चुके हैं। 2021 में कोरोना महामारी के दौरान भारत के कोरोना से लड़ने के प्रयासों में मदद करने के लिए भी उन्होंने फंड जुटाने के लिए अपील की थी। राज्याभिषेक के दौरान 90 वर्षीय लॉर्ड इंदरजीत सिंह ने किंग चार्ल्स तृतीय को राजचिह्न की एक प्रमुख वस्तु शाही दस्ताने भेंट किए।

राजा के रूप में जिम्मेदारियां
ब्रिटेन में संसदीय राजतंत्र है। यहां राजा भी हैं और संसद भी।
किंग ब्रिटेन के राष्ट्र प्रमुख हैं। हालांकि राजगद्दी की शक्तियां प्रतीकात्मक और औपचारिक हैं। ब्रिटेन का किंग राजनीतिक रूप से तटस्थ होता है। बतौर राष्ट्र प्रमुख किंग चार्ल्स तृतीय को सरकारी कामकाज और फैसलों की जानकारी हर दिन लेदर के लाल बॉक्स में मिलेगी। उन्हें महत्वपूर्ण बैठकों या दस्तावेजों की भी पहले से रिपोर्ट दी जाएगी, जिन पर उनके हस्ताक्षर जरूरी होंगे। प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सामान्य तौर पर हर बुधवार को बकिंघम पैलेस में किंग चार्ल्स से निजी तौर मिलेंगे और उन्हें सरकार के कामकाज की जानकारी देंगे।

राज्याभिषेक का अर्थशास्त्र
इस शाही ताजपोशी की तैयारी और सुरक्षा खर्च में ब्रिटेन के खजाने से करीब 2600 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। साथ ही इस दिन बैंकों का अवकाश भी रहा, जिससे अर्थव्यवस्था को करीब 0.7 प्रतिशत का झटका लगेगा। लेकिन इस ताजपोशी से हॉस्पिटेलिटी और एविएशन सेक्टर को जबर्दस्त बूस्ट मिला है।

नेहरू की हुई थी आलोचना

70 साल पहले 02 जून 1953 को पूर्व प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने महारानी एलिजाबेथ के राज्याभिषेक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। नेहरू की उपस्थिति को तब खास तौर पर दर्ज भी किया गया था। राज्याभिषेक में भाग लेने के निर्णय की वजह से नेहरू की भारत में खूब आलोचना भी हुई थी।

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