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सरकार का फरमान: 31 तक पूरा करो वैक्सीनेशन, नहीं तो कार्रवाई के लिए रहो तैयार

एक साल पहले 16 जनवरी 2021 को देश भर में कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान का आगाज होने के बावजूद अब तक भी शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन नहीं हो पाया है।

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विकास जैन
एक साल पहले 16 जनवरी 2021 को देश भर में कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान का आगाज होने के बावजूद अब तक भी शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन नहीं हो पाया है। इस बीच, अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 31 जनवरी तक अपने जिले में पहली और दूसरी डोज का शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन नहीं कर पाने वाले जिलों के सीएमएचओ कार्रवाई के लिए तैयार रहें। विभाग की ओर से उक्त अवधि तक सुनियोजित वैक्सीनेशन का प्लान नहीं बनाने और अब हड़बड़ी के आदेश से निचले स्तर तक खलबली मच गई है। इधर, ऐसे आदेश से फर्जी वैक्सीनेशन प्रमाण-पत्र जारी होने का अंदेशा खड़ा हो गया है।

इस आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री ने इस अवधि तक शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के आदेश दिए हुए हैं। लेकिन रविवार तक की समीक्षा के अनुसार प्रदेश में मात्र 12 जिले ऐसे हैं, जो पहली डोज का 90 प्रतिशत से अधिक 94.10 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर पाए हैं। जबकि प्रतापगढ़ को छोड़कर 33 में से 32 जिले दूसरी डोज में 90 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सके हैं। जयपुर जिले ने पहली डोज में तो 100 प्रतिशत हासिल कर लिया है, लेकिन दूसरी डोज में जिला अभी भी 70 प्रतिशत के करीब ही है। जबकि अब आदेश में लक्ष्य को हासिल नहीं करने पर संबंधित सीएमएचओ उन पर की जाने वाली कार्यवाही के लिए स्वयं ही जिम्मेदार माने जाएंगे।

...तो क्या हम फर्जी वैक्सीन लगाएं!
सबने देखा है, किस तरह सरकार के दबाव में स्टाफ को घर-घर वैक्सीन लगाने जाने पर धमकियां मिली हैं। वैक्सीन खराब होने पर भी कार्मिकों को ही कुछ लोगों ने दोषी ठहरा दिया। अब अधिक दबाव से तो और समस्या बढ़ेगी। लोग वैक्सीन नहीं लगवाएं तो क्या हम फर्जी वैक्सीन लगाएं...।

फर्जी वैक्सीनेशन के ऐसे-ऐसे मामले
प्रदेश में कुछ जिलों में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें मृतकों के भी वैक्सीनेशन प्रमाण-पत्र जारी होने के मामले सामने आए हैं। विभाग में चर्चा है कि इस तरह हड़बड़ी का आदेश जारी किए जाने के बाद इस तरह के मामले और बढ़ने की आशंका है।

धीमे पड़े वैक्सीनेशन को गति देने के लिए किया!
यह आदेश जारी करने वाले निदेशक आरसीएच डॉ.के.एल.मीणा से संपर्क नहीं हो पाया, वहीं गैर आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि यह धीमे पड़े वैक्सीनेशन को गति देने के लिए किया गया है। इससे फर्जी वैक्सीनेशन बढ़ने की आशंका पर विभाग का कहना है कि इसमें पहचान-पत्र लिया जाता है, ऐसे में इसकी अधिक गुंजाइश नहीं है।


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