
आजादी के 100 वें साल 2047 में विकसित भारत निर्माण की योजना तैयार करने में राजस्थान लीडर स्टेट की भूमिका से दूर रहेगा। जनवरी के पहले सप्ताह में प्रस्तावित मुख्य सचिव की कॉन्फ्रेंस में इस योजना पर विचार किया जाएगा। कॉन्फ्रेंस के एजेंडा निर्माण में प्रदेश को सहयोगी राज्य की भूमिका में रखा गया है। कॉन्फ्रेंस के एजेंडा निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई। इसमें रोजगार सृजन व समावेशी मानव विकास पर चर्चा होगी। इन दोनों विषयों को छह-छह भागों में बांटा गया है।
राजस्थान को रोजगार सृजन के अंतर्गत नियमों के जंजाल से राहत, शहरी व औद्योगिक ढांचा तथा एमएसएमई से जुड़े पहलुओं पर एजेंडा तैयार करने में सहयोग देने का जिम्मा सौंपा गया है, वहीं समावेशी मानव विकास के अंतर्गत महिला सुरक्षा व सशक्तीकरण, गैर संक्रामक रोग, स्वास्थ्य व पोषण तथा कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर भी प्रदेश सहयोगी की भूमिका में रहेगा। इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए 223 आइएएस अधिकारियों को जोड़ा गया है। इन आइएएस अधिकारियों को छह भागों में बांटा गया है। प्रदेश के सभी आइएएस अधिकारियों से छह बिन्दुओं पर फीडबैक मांगा गया है।
इनको मिला लीड स्टेट बनने का मौका
झारखंड, पंजाब, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और मध्यप्रदेश को लीड स्टेट बनाया गया है। सीएस कॉन्फ्रेंस का एजेंडा तैयार करने के लिए बनाए गए इन राज्यों से संबंधित समूहों में राजस्थान भी शामिल है। इन राज्यों के अलावा कुछ अन्य राज्यों को भी लीड स्टेट बनाया गया है। राजस्थान को लीड स्टेट नहीं बनाने का एक कारण राजनीतिक बताया जा रहा है, तो दूसरा कारण यह भी गिनाया जा रहा है कि पिछली सीएस कॉन्फ्रेंस के समय राजस्थान को लीड स्टेट बनने का मौका मिल चुका है।
इन विषयों पर फीडबैक देगा राजस्थान
राज्य सरकार ने रोजगार के अवसर, नियमों की उलझाहट कम करने, महिला सशक्तीकरण व सुरक्षा, गैर संक्रामक रोग, कौशल विकास और इंफ्रा विषयों पर प्रदेश के सभी आइएएस अधिकारियों से फीडबैक लिया है, जो केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है।
Published on:
13 Nov 2022 08:38 pm
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