
साइबर अपराध की नई खेप...! कहीं अगला शिकार आप तो नहीं...इस तरह बचें
जयपुर। जैसे-जैसे तकनीक का उपयोग बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। कभी मोबाइल पर लॉटरी-बोनस का मैसेज भेजकर तो कभी सरकारी योजना के तहत फ्री सामान बांटने का लालच देकर, साइबर अपराधी इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हर व्यक्ति को शिकार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में भले ही साइबर अपराध के मामले तीन वर्षों में घटे हो, लेकिन असल में अपराध बढ़ा है। साइबर फ्रॉड के लिए पिछले 30 माह में ही 4.79 लाख मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल हुआ।
चिंताजनक यह है कि शुरुआती 24 माह में तो केवल 79 हजार कनेक्शन पकड़े गए, जब कि इस वित्तीय वर्ष के 6 माह में ही 4 लाख कनेक्शन बंद करवाए गए हैं। पिछले पांच साल में 141.40 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई। इसमें से केवल 13.53 करोड़ रुपए की रिकवरी हुई। यह राशि भी उन पीड़ितों को ही मिली, जो जागरुक रहे। अब जरुरत है सावधान रहने की। केंद्र सरकार ने हमारी मदद के लिए तीन दोस्त (साइबर दोस्त, पोर्टल व हेल्पलाइन नंबर) चला रखे हैं। इनसे दोस्ती रखे और जागरुक होंगे तो साइबर अपराध का शिकार होने से बच जाएंगे।
सावधान, अपराधी इन नए तरीकों से कर रहे ठगी, इनसे बचें
1. सरकार से जुड़े कार्य और योजना के नाम पर : साइबर अपराधी इन दिनों सरकार से जुड़े कार्यों या योजनाओं में शामिल करने, नि:शुल्क सुविधा मुहैया कराने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। ठगी करने वाले लोगों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर बिजली बिल जमा नहीं होने पर कनेक्शन काटे जाने की धमकी दे रहे हैं। वहीं, चिरंजीवी योजना में शामिल करवाने, नि:शुल्क एलइडी या मोबाइल फोन देने के भी मैसेज लोगों को भेजे जा रहे हैं। लोग झांसे में आकर अपनी सारी जानकारी साइबर ठगों को दे रहे हैं। जानकारी का इस्तेमाल कर अपराधी लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। इन दिनों मोबाइल कनेक्शन को 5जी में परिवर्तित करने के लिए भी ओटीपी मांगे जा रहे हैं।
2. जूस-जैकिंग से उड़ा रहे निजी जानकारी : यह एक तरह का साइबर या वायरस अटैक होता है। इसमें अपराधी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर यूएसबी चार्जिंग पोर्ट के जरिए लोगों के मोबाइल, लैपटॉप में मालवेयर (वायरस) इन्स्टॉल करके पर्सनल डेटा चुरा लेते हैं। लोग मोबाइल को चार्ज करने के लिए पोर्ट पर लगाते हैं और मॉलवेयर अपने आप फोन में आ जाता है। इस प्रोसेस को जूस जैकिंग कहते हैं। जूस जैकिंग में हैकर कई बार फोन का पूरा नियंत्रण अपने पास ले लेते हैं। जूस जैकिंग के मामले भी सामने आए हैं।
3. वीडियो कॉल कर रहे सेक्सटॉर्शन : साइबर अपराधियों ने इन दिनों सेक्सटॉर्शन को ठगी करने का बड़ा जरिया बना रखा है। अपराधी अज्ञात नंबरों से वाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया एप पर वीडियो कॉल करते हैं। सामने स्क्रीन पर एक नग्नावस्था में लड़की होती है। स्क्रीन पर एक विंडो कॉल उठाने वाले की भी होती है। जिसे साइबर अपराधी रेकॉर्ड कर लेते हैं और फिर ब्लैकमेलिंग की जाती है। वहीं, रिमोट एक्सेस एप्स एनीडेस्क, टीम व्यूअर, ज्वाइन मी, फ्री कॉन्फ्रेंस कॉल, स्प्लैश शॉट आदि का इस्तेमाल कर भी सेक्सटॉर्शन किया जा रहा है।
राजस्थान में इतने मोबाइल कनेक्शन से अपराध, किए बंद
वर्ष-----मोबाइल कनेक्शन बंद
2020-21- 6000
2021-22- 73000
2022-23 (सितम्बर तक)- 4,00,000
रिटेलर ब्लेकलिस्ट
वर्ष---------------रिटेलर
2020-21- 110
2021-22- 36
2022-23 (अब तक)- 172
(दूरसंचार विभाग ने फर्जी और बिना दस्तावेज के सिम जारी करने वाले रिटेलर्स पर भी कार्रवाई की है। पिछले तीन माह में 318 रिटेलर को ब्लेकलिस्ट किया गया)
वर्ष 2021 में फ्रॉड के मामले
कम्प्यूटर से संबंधित मामले- 428
क्रेडिट कार्ड, डेबिड कार्ड- 20
डेटा चोरी- 4
महिलाओं व बच्चों के साथ स्टॉकिंग-बुलिंग -56
साइबर फ्रॉड- 371
एटीएम- 76
ऑनलाइन बैंकिंग- 148
ओटीपी- 76
अन्य- 51
फोर्जरी- 5
फोटो से छेड़छाड़- 3
फेक प्रोफाइल- 5
इन तीन दोस्तों से तत्काल करो शेयर
1. हेल्पलाइन नम्बर 1930 : गृह मंत्रालय ने देशभर के लिए एक यही नम्बर जारी किया है, लेकिन इसका एक्सेस हर राज्य को अलग-अलग है। किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड होता है तो तत्काल इस हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल करें। फाइनेंशियल फ्रॉड के शिकार हैं तो आप अपना बैंक खाता संख्या, आईएससी कोड, पेन नम्बर जरूर याद रखें। यहां पहले आपके खाते फ्रीज किए जाएंगे, जिससे और धोखाधड़ी नहीं हो। इसके बाद जांच।
2. पोर्टल-वेबसाइट : https://cybercrime.gov.in/ वेबपोर्टल है। इसके जरिए भी तत्काल शिकायत दर्ज कराने की सुविधा है। इसमें मोबाइल नम्बर अंकित करने के बाद ओटीपी आएगा और उसके बाद आपका ठगी होने की जानकारी दर्ज करनी होगी। निर्धारित समय बाद आपके पास साइबर सेल से कॉल आएगा।
3. साइबर दोस्त : साइबरदोस्त के नाम से ट्विटर हैंडल है। इसमें न केवल साइबर ठगी से बचने के उपाय बताए जाते हैं, बल्कि जागरुकता के लिए आॅनलाइन आॅडियो-वीडियो भी देखे जा सकते हैं। हर दिन क्वीज प्रतियोगिता भी होती है, जिसमें हर सवाल के चार विकल्प देते हैं और इसमें एक सही जवाब पूछा जाता है। इसके पीछे मकसद है कि लोग साइबर फ्रॉड के प्रति जागरुक रहें और परिजन-दोस्तों को भी जागरुक करें।
इनकी सूझबूझ ने पेश की नजीर, वापिस खाते में आए पैसे
1. अतुलजीत सिंह झाला, सेवानिवृत कर्मचारी
मुझे वाट्सएप कॉल आया और सामने वाले ने कहा कि मुझे पहचानों। जब मैं आवाज पहचान नहीं पाया तो उसने बोला कि मैं सुरेश बोल रहा हूं। मेरी नौकरी आपके समय लगी थी। मैं जहां नौकरी में था, वहीं सुरेश नाम कर्मचारी चपरासी था।उसने बताया कि उसकी बेटी का दाखिला मेडिकल कॉलेज में हो गया। मुझे भी यह सुन अच्छा लगा। फिर उसने कहा कि— बेटी अकेली झालावाड आ रही है और उसके पास कैश नहीं है। मैं उसे 20 हजार रुपए कैश दे दूं। इसके लिए उसने मुझसे मेरा बैंक खाता नम्बर पूछा और पहले ही पैसे जमा करने के लिए कहा। कुछ देर बाद ही मोबाइल पर पैसे निकलने का मैसेज आया और फिर 7 मिनट में 94 हजार रुपए खाते से निकल गए। कुछ देर बाद माजरा समझा तो हक्का—बक्का रह गया। कुछ घंटे बाद ही एक बैंक की महिला कर्मचारी के साथ साइबर सेल पहुंचा, जहां पुलिसकर्मियों ने तत्काल कार्यवाही शुरू कर दी। 9 दिन बाद खाते में एक रुपए जमा हुआ और उसके 15 दिन बाद सारे पैसे खाते में आ गए।
2. नितिन कटारिया, व्यवसायी
मैं डिपार्टमेंटल स्टोर संचालित करता हूं। पिछले साल 12 मार्च को अनजान नम्बर से कॉल आया। सामने वाले ने कहा कि वह सेना से बोल रहा है और उन्हें कुछ सामान चाहिए। सेना का नाम सुनकर ही गर्व महसूस हुआ। उसने कहा कि, उनका जवाब आएगा और सामान ले जाएगा। फोन पर ही सामान की सूची बनवाई और पैसे पूछे। फिर कहा कि, वह पहले ही खाते में पैसा जमा करवा देता है। बातों ही बातों क्रेडिट कार्ड के जरिए पैसा भिजवाने की बात कहकर उलझा लिया। मैंने भी क्रेडिट कार्ड की जानकारी दे दी। फिर ओटीपी आया, वह भी उन्हें बता दिया। दो ट्रांजक्शन में 1 लाख 7 हजार 970 रुपए खाते से निकल गए। यह बात दोस्तों को बताई तो उन्होंने तत्काल साइबर ब्रांच पहुंचाया। पता लगा कि फ्रॉड ने उसी पैसे से एक आॅनलाइन शॉपिंग पोर्टल से खरीददारी की। पुलिस ने कार्यवाही तेज की और चौथे दिन 35 हजा रुपए खाते में आए। बाकी पैसा अगले तीन दिन में आ गए।
3. सौभाग्यवती जैन, शिक्षिका
एसबीआई में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिस थी। उसी शाम मैं किचन में काम कर रही थी, उसी दौरान कॉल आया और काल कि वह बैंक से बोल रहा है। उसे मेंरी इस पॉलिसी की भी जानकारी थी। उसने कहा कि यदि बॉन्ड नहीं लेते हैं तो पॉलिसी का पूरा पैसा भी नहीं मिलेगा। यह सुन मैं परेशान हो गई। उसे बॉन्ड की कुछ राशि 45,500 रुपए बेटी के बैंक खाते से आॅनलाइन ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन बैंक पहुंची तो पता चला कि ऐसा कोई कॉल किया ही नहीं गया। बैंककर्मियों ने तत्काल साइबर टीम को सूचित किया। मैं बेटी के साथ वहां पहुंची, पुलिसकर्मियों ने भरसक प्रयास किए। करीब 5 माह बाद पैसे वापिस खाते में ओ गए।
साइबर ठगी में मेवात बना दूसरा 'जामताड़ा'
राजस्थान और हरियाणा का मेवात क्षेत्र साइबर क्राइम का दूसरा बड़ा गढ़ बन गया है। राजस्थान में भरतपुर और अलवर से जुड़ा क्षेत्र शामिल है। पिछले वर्ष ही उत्तराखंड के डीजीपी ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर इस क्षेत्र पर फोकस करने की जरूरत जताई थी। ज्यादातर फाइनेंशियल ठगी में झाडखण्ड़ का जामताड़ा और सेक्सटॉर्शन मामलों में राजस्थान का मेवात क्षेत्र का नाम शामिल है। सरकार ने साइबर ठगी में काम आए जो मोबाइल कनेक्शन बंद करवाए हैं उनमें 80 फीसदी मोबाइल नम्बर मेवात इलाके (भरतपुर, अलवर जिला) के हैं।
साइबर क्राइम के तरीके, जिसे जानना और बचना जरूरी
1. फिशिंग : धोखेबाज फोन कॉल के माध्यम से ग्राहक आईडी, नेटबैंकिंग पासवर्ड, एटीएम पिन, ओटीपी, सीवीवी जैसी व्यक्तिगत जानकारी हड़पते हैं। किसी वेबपोर्टल का मिलता-जुलता पेज तैयार करते हैं और जैसे ही व्यक्ति उसे पर यूजरआईडी-पासवर्ड अंकित करता है, वह उसके पास पहुंच जाता है।
2. बुलिंग- इलेक्ट्रॉनिक या संचार उपकरण (कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि) के माध्यम से उत्पीड़न या धमकाना।
3. स्टॉकिंग- संचार साधनों के जरिए ट्रेकिंग और परेशान करना।
4. ग्रुमिंग- ऑनलाइन ही यौन क्रिया-संबंध बनाने के लिए दबाव डालता है।
5. जॉब फ्रॉड- बेरोजगार या रोजगार की जरूरतमंद लोगों को ठगने का प्रयास। उनसे पैसे लेकर रोजगार दिलाने का झांसा देना।
6. सेक्सटॉर्शन- आॅनलाइन ही अश्लीलता परोसना और उसके जरिए फंसाकर ब्लेकमेल करना।
7. सेक्सटिंग- सेक्सटिंग आमतौर पर मोबाइल द्वारा किया जाता है। सेक्स गतिविधि का डिजिटल फोटो-वीडियो, टेक्स्ट संदेश या ईमेल पर फंसाने का काम।
8. स्मिशिंग- धोखाधड़ी के लिए उपयोग करने वाले फोन नंबर, वेबसाइट पर गलत सामग्री परोसी जाती है। लोगों को इसे डाउनलोड करने के लिए लुभाते हैं।
9. सिम स्वैप- आपकी आइडी हासिल कर या फर्जी आइडी बनाकर नई मोबाइल सिम जारी करा ले। तर्क दे- मौजूदा सिम खराब हो गई। जब यह सिम संचालित हो तो बैंक, यूजर आइडी व अन्य जानकारी हासिल कर लेता है। क्योंकि, नई सिम शुरू होते ही पहले वाली सिम स्वत: बंद हो जाती है।
10. डेबिट-क्रेडिट- किसी अन्य के क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी का अनधिकृत उपयोग कर उससे खरीदारी या उससे पैसा निकालना।
11. पहचान की चोरी- पहचान की चोरी धोखाधड़ी या बेइमानी से किसी के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या किसी अन्य विशिष्ट पहचान की चोरी।
12. स्पैमिंग- ईमेल, एसएमएस, सोशल मीडिया, वेबसाइट के जरिए अवांछित कॉमर्शियल मैसेज भेजा जाता है। ऐसे ठग लोगों को उस उत्पाद खरीदने के लिए फंसाते हैं। पैसा ट्रांजक्शन के दौरान लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं।
13. रैंसमवेयर- वर्चुअल फिरौती का माध्यम है। आपके कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल पर डेटा बैंक को चुराना या फिर ऐसी स्टोरेज फाइलों का एक्सटेंशन बदलकर उसे हैक और एन्क्रिप्ट करना। इसके बदले बिटकॉन के रूप में वसूली होती है।
14. डॉस (डेनियल ऑफ सर्विस) अटैक- किसी के आॅनलाइन बिजनेस को प्रभावित करते हैं। किसी का प्रोडेक्ट आॅनलाइन बिक्री करनी है या लांच करना है तो उसी दौरान उस वेबपोर्टल पर बेवजह लोगों का ट्रेफिक बढ़ाकर साइट को क्रेश करना।
15. वेबसाइट विरूपण- वेबसाइट के स्वरूप को बदलना या निष्क्रिय करना। उस वेबसाइट को हैक कर अश्लील चित्र, संदेश, वीडियो पोस्ट करना।
16. फार्मिंग- एक तरह का साइबर हमला है। इसके जरिए किसी वेबसाइट के ट्रेफ़िक को दूसरी फर्जी वेबसाइट पर पुनर्निर्देशित करने का प्रयास।
17. क्रिप्टोजैकिंग- क्रिप्टोकरेंसी के रूप में पैसा वसूलने के लिए कंप्यूटर संसाधनों का अनाधिकृत तरीके से उपयोग।
Published on:
23 Nov 2022 07:33 pm
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