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देशभर में संस्थानों के डेटा पर साइबर ठगों की नजर, राजस्थान पुलिस ने जारी किया अलर्ट

Cyber Attack on NAS: साइबर ठगों का नया शिकार बना Network Attached Storage डिवाइस। ऐसी सभी जगहें जहां बड़ा डेटा NAS पर रखा जाता है, वे हाई रिस्क जोन में हैं।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Mar 31, 2026

Network Attached Storage Attack: जयपुर. राजस्थान पुलिस ने संस्थानों के महत्वपूर्ण डेटा को बचाने के लिए साइबर अलर्ट जारी किया है। साइबर अपराधी अब NAS (Network Attached Storage) डिवाइस को अपना नया टारगेट बना रहे हैं। ये डिवाइस ऑफिस, फर्म और संस्थानों में सारा डेटा एक जगह स्टोर करने और नेटवर्क से जोड़ने के काम आता है। ऐसी सभी जगहें जहां बड़ा डेटा NAS पर रखा जाता है, वे अब हाई रिस्क जोन में हैं। राजस्थान पुलिस ने सभी संस्थानों से अपील की है कि वे अपनी डेटा सिक्योरिटी को मजबूत करें।

पुलिस ने अलर्ट क्यों जारी किया ?

राष्ट्रीय स्तर पर IndianCyberCrimeCoordinationCentre (I4C) की रिपोर्ट और निगरानी के आधार पर यह खतरा सामने आया है। साइबर ठग कमजोर पासवर्ड, पुराना सॉफ्टवेयर या अनधिकृत एंट्री का फायदा उठाकर NAS सिस्टम में घुस रहे हैं। इसके बाद वे पूरा डेटा लॉक (encrypt) कर देते हैं और भारी फिरौती (ransomware) की मांग करते हैं। अगर पैसे न दिए गए तो डेटा सार्वजनिक करने या हमेशा के लिए नष्ट करने की धमकी देते हैं।

राजस्थान में पुलिस ने Precautionary अलर्ट जारी किया

अभी तक राजस्थान में कोई बड़ा NAS हमला रिपोर्ट नहीं हुआ है, लेकिन I4C की चेतावनी के बाद पुलिस ने पूर्वानुमान (precautionary) अलर्ट जारी किया है ताकि संस्थान सतर्क हो जाएं। देशभर में मीडिया हाउस और बड़े अस्पतालों पर ऐसे हमलों की घटनाएं पहले भी देखी गई हैं।

कौन ज्यादा जोखिम में ?

  • चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्म
  • आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियां
  • अस्पताल
  • मीडिया संस्थान
  • स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान

हमला कैसे होता है?

  • कमजोर या डिफॉल्ट पासवर्ड का इस्तेमाल
  • सॉफ्टवेयर को अपडेट न रखना
  • इंटरनेट पर NAS को खुला (publiclyaccessible) छोड़ देना
  • अनधिकृत प्रवेश के बाद डेटा चोरी या लॉक करना

पुलिस की सलाह – तुरंत अपनाएं ये उपाय

  • मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करें और Multi-Factor Authentication (MFA) जरूर लगाएं।
  • सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर को हमेशा अपडेट रखें।
  • नियमित ऑफलाइन बैकअप लें (कम से कम 3-2-1 नियम फॉलो करें)।
  • कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत सिस्टम आइसोलेट करें।
  • साइबर ठगी का शिकार होने पर 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।