अल्पसंख्यक साइबर ग्राम योजना को लेकर लोकसभा में सांसद ओम बिडला व रमेश बिधूडी के अतारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि अल्पसंख्यक साइबर ग्राम परियोजना फरवरी 2014 में डिजिटल साक्षरता के लिए अलवर के अल्पसंख्यक बहुल गांव चांदौली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई।
योजना के तहत डिजिटल साक्षरता के लिए गांव के प्रत्येक परिवार से दो लोगों का चयन किया गया। गांव में लगभग 1300 घर थे।
इनमं रहने वाले गैर अल्पसंख्यकों सहित 2600 लोगों का डिजिटल साक्षरता के लिए चयन किया गया। यहां डिजिटल एम्पायरमेंट फाउण्डेशन नाम संगठन के सहयोग से योजना आरम्भ की गई। अब परियोजना पूरी हो चुकी है।
अब तक कार्यक्रम से 2890 लोग लाभान्वित हुए हैं। प्रायोगिक परियोजना की सफलता के बाद मंत्रालय साइबर ग्राम कार्यक्रम को 2014-15 से बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम की योजना के साथ मुख्य धारा में लाया और सभी राज्य सरकारों व संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को दिशा-निर्देश जारी किए गए।
सरकार ने बताया कि साइबर ग्राम का शुभारम्भ अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर में प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की एक पहल के रूप में किया गया। ताकि वे सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी कौशल का मूलभूत ज्ञान प्राप्त करने, डिजिटल साक्षर बनने में समर्थ हो सकें।
सरकार ने बताया कि पहल के अन्तर्गत 57.79 करोड की लागत के साथ अब तक उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और राजस्थान के 3 लाख 71 हजार 657 विद्यार्थियों के प्रशिक्षण को अनुमोदित किया गया है।