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जेडीए का खेल… करोड़ों की सरकारी जमीन कॉलोनी में जोड़ी… मामला खुला तो प्रक्रिया होल्ड पर

मनमर्जी करने वालों पर अब तक कार्रवाई नहीं वर्ष 2007 में जेडीए में 82458 वर्ग गज पर कॉलोनी पर योजना सृजित की वर्ष 2023 में 90600 वर्गगज पर सृजित कर दी संशोधित योजना

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जयपुर

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GAURAV JAIN

Jan 24, 2024

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प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत जेडीए में अधिकारियों की मनमानी चली है। तभी तो वर्ष 2007 में बिल्डिंग प्लान कमेटी (लेआउट प्लान) की बैठक में प्रताप नगर स्थित कृष्णा विहार कॉलोनी 82458 वर्ग गज में सृजित की गई थी। उसी योजना को वर्ष 2023 में संशोधित कर जोन स्तरीय समिति ने 90600 वर्ग गज में सृजित कर दी। जिस जमीन को जेडीए अधिकारियों ने जोड़ा, वह जमीन सरकारी है। माना जा रहा है कि भूमाफिया से सांठगांठ कर जेडीए ने सरकारी जमीन को योजना में शामिल कर लिया। 8142 वर्ग गज सरकारी जमीन कॉलोनी में शामिल की गई है। बाजार में इसकी कीमत 40 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। इस गड़बड़झाले की शिकायत कॉलोनी के लोगों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जनसुनवाई में भी की है।

न निरस्त किया न ही कार्रवाई

जेडीए अधिकारियों ने आचार संहिता से पहले अगस्त में उक्त कॉलोनी का नियमन शिविर लगाया। शिविर के दौरान ही सामने आया कि जमीन को गुपचुप तरीके से बढ़ा दिया गया। जेडीए ने बढ़े हुए क्षेत्रफल पर रोक लगा दी, लेकिन अब तक इसे निरस्त नहीं किया और न ही मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की है।

-अगस्त में ही इसी सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ प्रवर्तन शाखा ने कार्रवाई की और अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे।

इन सवालों के जवाब नहीं

-जब जमीन सरकारी है जो उक्त जमीन को आवासीय कॉलोनी में सृजित कैसे कर दिया गया।

-जो क्षेत्रफल बढ़ाया गया है, उसमें अर्बन प्लानर और सेवानिवृत्त अमीन के हस्ताक्षर हैं। दोनों में से एक भी सरकारी कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत नहीं है।

आदेशों की परवाह नहीं

-27 दिसम्बर, 2022 को जेडीए सचिव ने आदेश जारी किया। इसमें साफ लिखा है कि जोन में तैनात सेवानिवृत्त तहसीलदार पत्रावलियों के निष्पादन और संधारण का काम नहीं करेंगे।

-नौ मई, 2023 को जेडीए सचिव ने एक और आदेश जारी किया। इसमें लिखा कि पटवारी, अमीन और भू-अभिलेख निरीक्षक से ही पत्रावलियों का निष्पादन करवाएं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों से काम नहीं करवाएं।

-10 नवम्बर, 2023 को नगर नियोजक निदेशक कार्यालय का एक और आदेश जारी हुआ। इसमें अर्बन प्लानर के काम को गलत बताया। इसमें लिखा कि सहायक नगर नियोजक के पदनाम का उपयोग करते हुए कार्रवाई की जा रही है, जो उचित नहीं है।