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नदी में डूबे किशोर का 23 घंटे बाद मिला शव, घर में मचा कोहराम

चंद्रपुरा व बिसालू के बीच मासी नदी की पुल पर करीब चार फीट ऊंचाई में बह रहे पानी के तेज बहाव में मंगलवार देर शाम बहे तेरह वर्षीय किशोर रामराज गुर्जर का शव 23 घंटे बाद आखिर बुधवार अपरान्ह करीब 3 बजे रेस्क्यू टीम को पानी में मिला।

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माधोराजपुरा (जयपुर)। चंद्रपुरा व बिसालू के बीच मासी नदी की पुल पर करीब चार फीट ऊंचाई में बह रहे पानी के तेज बहाव में मंगलवार देर शाम बहे तेरह वर्षीय किशोर रामराज गुर्जर का शव 23 घंटे बाद आखिर बुधवार अपरान्ह करीब 3 बजे रेस्क्यू टीम को पानी में मिला। स्थानीय थाना पुलिस ने माधोराजपुरा के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। उधर जैसे ही शव मिलने की सूचना बिसालू गांव में मृतक के परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। मृतक की मां चिड़ी देवी बार-बार बेहोश हो रही थी, तो बुजुर्ग दादी मथुरा देवी के आंसू भी नहीं थम रहे थे। पिता रामावतार गुर्जर, दादा बदरी लाल, मृतक के बड़े भाई दिलखुश व अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। आस-पड़ौस की महिलाएं, ग्रामीण, रिश्तेदार तथा समाजबंधु परिजनों को ढाढस बंधा रहे थे। जानकारी के मुताबिक मृतक रामराज दो भाइयों में छोटा था।

एसडीआरएफ टीम ने रात में भी चलाया सर्च ऑपरेशन

घटना के बाद मौके पर पहुंची एसडीआरएफ टीम ने रात के अंधेरे में भी सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह जल्द ही तलाशी अभियान पुन: शुरू किया गया। माधोराजपुरा एसडीएम राजेश कुमार मीणा व एसएचओ देवेन्द्र चावला भी रेस्क्यू टीम के साथ नदी किनारे खड़े रहे। शव पानी में डूब जाने से रेस्क्यू टीम को सफलता नहीं मिली। जैसे ही शव फूलकर ऊपर आया तो टीम को घटनास्थल से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर शव दिख गया। माधोराजपुरा सीओ पार्थ शर्मा, सरपंच हीरा देवी चौधरी, ग्राम विकास अधिकारी भगवान सहाय शर्मा, चांदमाकला हलका पटवारी रामसागर मीणा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर मौजूद थे।

चंद्रपुरा से बिसालू जा रहा था मृतक

जानकारी के मुताबिक मृतक रामराज निवासी बिसालू हाल निवासी चंद्रपुरा अपने परिजनों के साथ बिसालू गांव स्थित तेजाजी मंदिर में दर्शन के लिए जा रहा था। देर शाम करीब 7.30 बजे वह परिजनों के साथ नदी पार करने के लिए पानी में उतर गया। पुल पर करीब चार फीट ऊंचाई में वेग से बह रहे पानी में वह संतुलन खो बैठा। उसे बहता देख उसके दादा रोडूराम ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी के वेग से उसके हाथ छूट जाने से वह उसे बहने से नहीं बचा सका।

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