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एससी एसटी को किसी को भी जमीन बेचने का मिले अधिकार,कानून में हो बदलाव

(Rajasthan Assembly )विधानसभा में शुक्रवार को राजस्व,प्रशासन और पेंशन संबंधी मामलों की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान बहरोड़ के निर्दलीय (MLA Baljeet Yadav) विधायक बलजीत यादव ने (SC ST ) एससी व एसटी की (Land) जमीनों को अपनी इच्छा से किसी को भी बेचने पर लगी(Leagl bar) कानूनी पाबंदी को हटाने की आवश्यकता बताई।

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जयपुर

(Rajasthan Assembly )विधानसभा में शुक्रवार को राजस्व,प्रशासन और पेंशन संबंधी मामलों की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान बहरोड़ के निर्दलीय (MLA Baljeet Yadav) विधायक बलजीत यादव ने (SC ST ) एससी व एसटी की (Land) जमीनों को अपनी इच्छा से किसी को भी बेचने पर लगी(Leagl bar) कानूनी पाबंदी को हटाने की आवश्यकता बताई। कानूनी पाबंदी के कारण एससी-एसटी को अपनी जमीनों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता क्यों कि उनकी जमीन अन्य कोई नहीं खरीद सकता। जबकि,अनारक्षित वर्ग वालों को उन्हीें की नजदीक की जमीन की पूरी कीमत मिलती है। पिछले सालों में सामाजिक हालात बदल चुके हैं और एससी व एसटी को अपनी जमीन किसी को भी बेचने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे उनके आर्थिक हालात सुधरेगें और भेदभाव समाप्त होगा।

सत्ता में आकर भूल जाते हैं...

यादव ने कहा कि अधिकांश नेता सत्ता में आकर अफसरों की वकालत करने लगते हैं और भूल जाते हैं कि यह वही लोग हैं जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। सत्ता से बाहर होने के बाद ही इन लोगों को पता चलता है कि वह क्या कर रहे थे। यह समझ नहीं आता कि अधिकारी जानबूझकर सुधार नहीं करना चाहते या उन्हें जनता को परेशान करने में मजा आता है।

सार्दुलशहर के विधायक जगदीश चन्द्र ने रेवेन्यू बोर्ड को बांटकर संभागीय स्तर पर खोलने की आवश्यकता बताते हुए राजस्थान काश्तकारी कानून में बदलाव कर राज्य के किसानों को हरियाण के समय जमीन का मालिकाना हक देने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में काश्तकारी कानून में बदलाव की जरुरत है क्यों कि परिवार बढऩे के साथ ही बंटवारे भी ज्यादा हो गए हैं। जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा ने जमीन का सीमांकन या पत्थरगढ़ी के आदेश की पालना के लिए समय सीमा तय करने,सरकारी जमीनों को अतिक्रमियों से मुक्त करवाने,सड़कों को राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने और राजस्व रिकार्ड को ऑन-लाइन करने का सुझाव दिया। कैलाश त्रिवेदी ने एनएचएआई से किसानों को मुआवजा दिलवाने की मांग की।

नकेल कसनी होगी अफसरों की...

मदन प्रजापत ने विधायकों के प्रोटोकॉल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विधायक मुख्य सचिव से ऊपर होता है। लेकिन आमजन पटवारी से बात करने में डरता है लेकिन,मंत्री से नहीं। इसलिए सभी को इस पर विचार करना होगा क्यों कि सभी सदस्य अफसरों पर नकेल कसने की बात कर रहे हैं। अधिकारियों में या तो अहंकार है या काम का बोझ है इसलिए व्यवस्था में बदलाव के साथ वास्तविक तौर पर नकेल कसने की जरुरत है। कई अफसर मंत्रियों की चमचागिरी करते हैं और समझते हैं कि कोई भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्होंने लूणी नदी से अतिक्रमियों को हटाने, अपात्रों को आरआई से नायब तहसीलदार के प्रमोशन देने,आरपीएससी को भर्ती कलेंडर जारी करने की मांग की।

चौमूं के विधायक रामलाल शर्मा ने जयपुर में एक और कलक्टर लगाने की मांग की तो चंद्रकांता मेघवाल ने अब तक किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में न्यौता नहीं मिलने की शिकायत करते हुए प्रोटोकॉल देने और सैटलमेंट की कमियों को कैंप लगाकर दुरस्त करने की मांग की। नारायण बेनीवाल ने जवाबदेही कानून लागू करने की मांग करते हुए आरपीएससी व कर्मचारी चयन बोर्ड पर सवालिया निशान लगाया। आेमप्रकाश हुड़ला ने महुआ में दो निजी व्यक्तियों की जमीन पर जबरन बनाए गए हैलीपैड को हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्हें एक-एक घंटा और हमें ५ मिनट ! ...

बहस के दौरान सभापति राजेन्द्र पारीक ने अचानक सदस्यों के बोलने के लिए मात्र ५ मिनट का समय तय कर दिया। इसके बाद खुशवीर सिंह जोजावर का नाम पुकारा तो खुशवीर नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि मैं बहुत दु:खी हूं क्यों कि वह सुबह से लेकर अंत तक बैठे रहते हैं और उन्हें बोलने के लिए मात्र ५ मिनट का समय दिया जा रहा है। जबकि पहले बोलने वालों को एक-एक घंटा दिया जाता है और यह हमें प्रताडि़त करने वाली बात है। नाराज खुशवीर ने सभापति को कहा कि भले ही उन्हें कोई उम्मीद ना हो लेकिन क्षेत्र की जनता केा हमसे बहुत उम्मीद हैं और भले ही हम बहुत ज्ञानी नहीं हैं लेकिन हमारी जनता चाहती है कि उनकी बात भी विधानसभा में रखी जाए। इसके बाद खुशवीर सिंह नाराज होकर सदन से बाहर चले गए हालांकि सभापति ने उन्हें आइंदा पहले बोलने का मौका देने का आश्वासन दिया।

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