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सर्दी बढ़ने के साथ ही बढ़ने लग जाती है गजक की मांग, तिल- गुड़ का मिश्रण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

ठंड के मौसम में बाजारों में गर्म खाद्य व पेय पदार्थों के साथ गजक की मांग बढ़ जाती है। आम बोलचाल की भाषा में गजक को सर्दी का टॉनिक माना जाता है। बाजारों में गजक की दुकानों में खासी ग्राहकी दिखाई दे रही है।

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सर्दी बढ़ने के साथ ही बढ़ने लग जाती है मांग, तिल- गुड़ का मिश्रण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

सर्दी बढ़ने के साथ ही बढ़ने लग जाती है मांग, तिल- गुड़ का मिश्रण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

ठंड के मौसम में बाजारों में गर्म खाद्य व पेय पदार्थों के साथ गजक की मांग बढ़ जाती है। आम बोलचाल की भाषा में गजक को सर्दी का टॉनिक माना जाता है। बाजारों में गजक की दुकानों में खासी ग्राहकी दिखाई दे रही है। जयपुर की गजक ने देश के साथ विदेशों में भी ख्याति प्राप्त कर रखी है। सर्दी बढ़ने के साथ ही तिल-गुड़ से बनी गजक की मांग भी बढ़ गई है। हालांकि इस साल लोगों को इनकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी। जयपुर में गजक का कारोबार सदियों पुराना है, लेकिन कई युवा व्यवसायियों ने व्यापार के आधुनिक तरीके अपनाकर जयपुर की गजक को दुनियाभर में पहुंचा दिया है। अब जयपुर से गजक का एक्सपोर्ट भी होता है। सर्दी का मौसम आते ही पूरे देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को जयपुर की गजक पहुंचाई जाती है। तिल और गुड़ के साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से गजक की लागत में भी इजाफा हुआ है। इसका असर गजक के भावों पर भी पड़ा है। पिछले साल गजक 300 रुपए किलो थी, जो अब बढ़कर 350 से 400 रुपए किलो तक पहुंच गई है।

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पिछले साल से 10 फीसदी महंगी
महंगाई का असर गजक पर भी बढ़ा है। तिल और गुड़ के साथ पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने गजक की लागत में भी इजाफा किया है। इस साल गजक के दामों में पिछले साल के मुकाबले 25 से 50 रुपए किलो की तेजी आई है।

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जयपुर की गजक विदेशों में भी निर्यात

जयपुर की गजक की देश भर में सप्लाई की जाती है। यह व्यापार अक्टूबर से शुरु होकर फरवरी-मार्च तक चलता है। इन दिनों राज्य से सैकड़ों क्विंटल गजक पूरे भारतवर्ष में सप्लाई की जाती है। कुछ लोगों की डिमांड पर विदेशों में भी निर्यात की जाती है।