
Dev Uthani Ekadashi 2022: देवउठनी एकादशी पर बन रहे ये संयोग, मांगलिक कार्यों के लिए रहेंगे शुभ
Dev Uthani Ekadashi 2022: जयपुर। कार्तिक शुक्ल एकादशी को शुक्रवार को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। लंबे अंतराल के बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू होंगे। वहीं मंदिरों के साथ घर—घर देव उठाए जाएंगे। तुलसी विवाह के आयोजन होंगे। इस दिन पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और कुमार योग का संयोग रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि देव उठनी एकादशी का अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और कुमार योग रहेगा। ये दोनों ही सूर्योदय के साथ शुरू होंगे, जो दिनभर रहेंगे। उन्होंने बताया कि शुक्र का तारा अस्त अबूझ मुहूर्तों को प्रभावित नहीं करता है, ऐसे में देवउठनी एकादशी पर मांगलिक कार्य हो सकेंगे। इसके बाद 28 नवम्बर को 10 रेखीय सावे के साथ पंचागीय मुहूर्त शुरू हो जाएंगे, इस माह दो दिन 10 रेखीय सावे है, जो विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेंगे।
24 नवंबर को उदय होगा शुक्र का तारा
ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि देवउठनी एकादशी पर शुक्र का तारा अस्त रहेगा, जो 24 नवम्बर को उदय होगा। इस दिन रात 12 बजकर 15 मिनट पर शुक्र का तारा उदय होगा। इसके अगले 3 दिन इसका बाल्यत्व दोष रहेगा, ऐसे में पंचागीय सावों की शुरुआत 28 नवम्बर को 10 रेखीय सावे से हो रही है। शुक्र का तारा एक अक्टूबर को अस्त हुआ था।
गोविन्ददेवजी के होगा सालिगराम पूजन
आराध्य देव गोविंद देव जी में देवउठनी एकादशी महोत्सव कल बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिर के प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में धूप झांकी के बाद सुबह 9: 30 बजे सालिगराम जी को चौकी पर विराजमान करके मंदिर के दक्षिण-पश्चिम कोने पर स्थित तुलसी मंच पर लाकर विराजमान कराया जाएगा। यहां सालिगराम जी का पंचामृत अभिषेक कर पूजन किया जाएगा। आरती के बाद तुलसी महारानी जी का पूजन किया जाएगा। तुलसी महारानी जी एवं सालीगराम की चार परिक्रमा करने के बाद सालीगराम जी को चांदी के रथ पर विराजमान करके मंदिर की एक परिक्रमा कर वापिस गर्भगृह में विराजमान कर दिया जाएगा। उसके बाद श्रृंगार आरती के दर्शन होंगे। ठाकुर श्रीजी को लालजामा पोशाक धारक कराई जाती है एवं विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
Published on:
03 Nov 2022 03:11 pm
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