
देवशयन में इनका नहीं रखा ध्यान तो साल भर का पुण्य खत्म
देवशयन में इनका नहीं रखा ध्यान तो साल भर का पुण्य खत्म
— देवशयन में तीन एकादशी का विशेष महत्व
जयपुर। आषाढ शुक्ल एकादशी (Devshayani Ekadashi) पर 20 जुलाई को रवि योग और राजयोग में देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इसके साथ की 119 दिन के लिए देव सोयेंगे। इस बीच आने वाली आषाढ़ शुक्ला एकादशी, भाद्रपद शुक्ला एकादशी औैर कार्तिक शुक्ला एकादशी का विशेष महत्व (special importance) रहेगा। इन एकादशी का व्रत समाप्त करने के लिए भोजन करते समय अनुराधा, श्रवण और रेवती नक्षत्रों का विशेष ध्यान रखना होगा। अगर इन नक्षत्रों आदी, मध्य व अंतिम चरण को छोड़कर भोजन नहीं किया तो सालभर का पुण्य नष्ट हो सकता है।
ज्योतिषाचार्य आदित्य मोहन ने बताया कि धर्मशास्त्र के अनुसार देवशयन के दौरान चार महीनों में आषाढ़ शुक्ला एकादशी, भाद्रपद शुक्ला एकादशी औैर कार्तिक शुक्ला एकादशी का अत्यधिक महत्व रहेगा। आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष में अनुराधा नक्षत्र के प्रथम चरण में भगवान विष्णु शयन करते हैं। भाद्रपद में शुक्ल पक्ष में श्रवण नक्षत्र के मध्य भाग में भगवान विष्णु करवट लेते हैं। कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष में रेवती नक्षत्र के अंतिम भाग में भगवान विष्णु जागते हैं। ऐसे में आषाढ़ शुक्ला एकादशी, भाद्रपद शुक्ला एकादशी औैर कार्तिक शुक्ला एकादशी का व्रत समाप्त करने के लिए भोजन अनुराधा, श्रवण व रेवती नक्षत्रों के क्रमश आदी, मध्य व अंतिम चरण को छोड़कर करना चाहिए। यदि भूलवश ऐसा नहीं किया जाता है तो 12 महीने की एकादशी के व्रत का फल प्राप्त नहीं होता है।
Published on:
18 Jul 2021 10:53 am
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