
digamber singh
जयपुर। राजस्थान सरकार भले ही स्वाइन फ्लू से निपटने के पुख्ता इंतज़ाम के दावे ठोक रही हो, लेकिन सरकार के इन दावों की पोल उस समय खुल गई, जब पूर्ववर्ती सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे और पार्टी के दिग्गज नेता डॉ. दिगम्बर सिंह ही स्वाइन फ्लू के शिकार हो गए। अगर हमारे नेता ही स्वाइन फ्लू से सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी की सुरक्षा के बारे में सरकार के किसी भी दावे पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। डॉ.सिंह का निधन होने के बाद अस्पताल की ओर से सीएमएचओ को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि सिंह को जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। जो कि बादमें रिकवर हो गया था। निधन का कारण एक्यूट लिवर फेलियर और मल्टी ऑर्गन फेलियर बताया गया था। डॉ.सिंह को पैनक्रियाज का कैंसर भी था।
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हद तो यह है कि इसस पहले पार्टी की महिला विधायक कीर्ति कुमारी की स्वाइन फ्लू की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार की अब तक कोई पुख्ता योजना सामने नहीं आई है। हर बार की तरह इस बार भी सरकार सर्दी आने का इंतजार कर रही है कि सर्दी आ जाए तो स्वाइन फ्लू से निजात मिल जाए। हालात इस कदर बिगड़ रहे हैं कि सोशल मीडिया पर भी लोग सरकार से सवाल पूछ रहे है कि जब प्रदेश में स्वाइन फ्लू के कहर से वीआईपी ही
सुरक्षित नहीं हैं तो सरकार आम आदमी की कैसे सुरक्षा करेगी। प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू से 218 लोगों की मौत हो चुकी है। भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. दिगंबर सिंह का शुक्रवार को स्वाइन फ्लू से निधन हो गया। मूलत: भरतपुर के रहने वाले सिंह भाजपा में दिग्गज जाट नेता माने जाते थे। वे दो बार विधायक रहे और पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में चिकित्सा मंत्री भी रहे। सिंह के निधन पर मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित अन्य राजनेताओं ने शोक जताया है।
अब तक 218 लोगों की मौत
प्रदेश में स्वाइन फ्लू से अब तक 218 लोगों की मौत हो चुकी है और पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 2960 के पार पहुंच गया है। वहीं प्रतिदिन प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ रहे हैं।
Published on:
27 Oct 2017 05:52 pm
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