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नवजात शिशुओं से जुड़ी बीमारियों और इलाज की एडवांस तकनीक पर हुई चर्चा

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के आईएपी निओनेटोलॉजी चैप्टर और नेशनल निओनेटोलॉजी के संयुक्त तत्वाधान में बिरला ऑडिटोरियम में 24 मार्च से शुरू हुई।

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नवजात शिशुओं से जुड़ी बीमारियों और इलाज की एडवांस तकनीक पर हुई चर्चा

नवजात शिशुओं से जुड़ी बीमारियों और इलाज की एडवांस तकनीक पर हुई चर्चा

जयपुर। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के आईएपी निओनेटोलॉजी चैप्टर और नेशनल निओनेटोलॉजी के संयुक्त तत्वाधान में बिरला ऑडिटोरियम में 24 मार्च से शुरू हुई। तीन दिवसीय वार्षिक कांफ्रेंस के दूसरे दिन देश विदेश से आए डेलीगेट्स और डॉक्टर्स ने नवजात शिशुओं से जुड़ी बीमारियों और उनके इलाज की एडवांस तकनीक पर चर्चा की। आईएपी निओकॉन 2023 के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ जे के मित्तल ने बताया कि आईएपी निओकॉन कांफ्रेंस में देश विदेश के 1200 से ज्यादा डेलीगेट्स शामिल हुए। नवजात बच्चों से जुड़ी बीमारियों और उनकी मृत्यु दर कम करने और उनके इलाज की एडवांस तकनीकों पर विचार विमर्श किया गया। डॉ मित्तल ने आगे बताया कि समय से पहले जन्मे बच्चों के अंग विकसित नहीं हो पाते है। जिस वजह से उनके फेफड़ों में सूजन सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां आती हैं। लेकिन अब हम इलाज में एडवांस तकनीक के माध्यम नवजात बच्चों का इलाज कर रहे हैं जिसमे पतले कैथेटर से सर्फेक्टेंट मेडिसिन दी जाती है। जिससे बच्चों के फेफड़े विकसित हो जाते हैं, यह सारी प्रक्रिया बिना नली डाले और बिना वेंटीलेटर पर रखे सी-पेप मशीन पर लेकर की जाती है। इस कांफ्रेंस का उद्देश्य इन एडवांस तकनीक को यंग डॉक्टर्स को सिखाना और नवजात बच्चों के माता पिता तक पहुंचाकर उन्हे जागरूक करना है जो प्री टर्म में जन्मे बच्चों के इलाज के दौरान निराश हो जाते हैं और उनके बचने की उम्मीद छोड़ देते हैं। हम उनको यह बताना चाहते हैं अगर मां बाप थोड़ा भरोसा और धैर्य रखें तो ऐसे बच्चों को भी बचाया जा सकता है। इसके अलावा बॉलीवुड नाइट्स, और विभिन्न टॉपिक्स पर डॉक्टर्स के सेशन आयोजित किए गए।