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दिव्यांग बने बीपीएल मगर गाइडलाइन नहीं बनने से अटका लाभ

राज्य सरकार को खुद को दिव्यांगों का हितैषी बताकर कई घोषणाएं करती हैं, लेकिन उनके ही महकमे इन घोषणाओं को 'पलीता' लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा ही एक मामला दिव्यांजनों को बीपीएल श्रेणी में शामिल करने का है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Dec 03, 2022

दिव्यांग बने बीपीएल मगर गाइडलाइन नहीं बनने से अटका लाभ

दिव्यांग बने बीपीएल मगर गाइडलाइन नहीं बनने से अटका लाभ

जयपुर। राज्य सरकार को खुद को दिव्यांगों का हितैषी बताकर कई घोषणाएं करती हैं, लेकिन उनके ही महकमे इन घोषणाओं को 'पलीता' लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा ही एक मामला दिव्यांजनों को बीपीएल श्रेणी में शामिल करने का है। राज्य सरकार की बजट घोषणा के ढाई साल बाद और करीब चार महीने पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने पेंशनधारी दिव्यांगजन और उनके परिवार को बीपीएल में शामिल करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक गाइडलाइन जारी नहीं होने से दिव्यांगों को बीपीएल श्रेणी में मिलने वाले लाभ से महरूम होना पड़ रहा है।

कांग्रेस ने जन घोषणा पत्र में दिव्यांग और उसके परिवार को बीपीएल के समान सभी सुविधाएं प्रदान करने का वादा किया था। 3 दिसंबर 2020 विश्व दिव्यांग दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने फिर यह घोषणा की थी कि दिव्यांग और उनके परिवार को बीपीएल की तरह सभी सुविधाएं प्रदान की जाएगी। इसके बाद बजट सत्र 2021-22 में सीएम ने घोषणा की थी कि दिव्यांग पेंशनर्स और उनके परिवार को बीपीएल परिवारों की तरह सभी सुविधाएं प्रदान की जाएगी। इसके बाद विभाग ने चार महीने पहले इस संबंध में आदेश जारी किए, लेकिन अभी तक गाइडलाइन का इंतजार है।

20 लाख से ज्यादा को मिलेगा फायदा

अभी प्रदेश में करीब दिव्यांग पेंशनर्स हैं। अगर एक के परिवार में तीन से चार सदस्य भी हैं तो 20 लाख से ज्यादा लोगों को इस आदेश का सीधा फायदा मिलेगा। बीपीएल को एक रुपए किलो में मिलने वाला गेहूं, निशुल्क चिरंजीवी योजना का लाभ, बीपीएल को सस्ती दरों पर मिलने वाल मकान व अन्य सुविधाओं का लाभ भी सीधे तौर पर दिव्यांगों को मिल सकेगा।


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इन घोषणाओं को पूरा होने का इंतजार

—दिव्यांगों को मुफ्त शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी
—प्रतिभावान दिव्यांग विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक, मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के तहत पांच सौ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय सहायता।
—दिव्यांगजनों की पुत्रियों के विवाह की राशि बढ़ाना
—दिव्यांगजनों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श कर महती कार्ययोजना बनाना
—सार्वजनिक स्थलों पर दिव्यांगों की पहुंच बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाना
—दिव्यांगजनों की विशेष योग्यता को देखते हुए सरकार में उपलब्ध पदों को चिन्हित कर उन पर नियुक्ति के लिए आरक्षण की व्यवस्था
—सामान्य स्त्री/ पुरुष द्वारा दिव्यांग पुरुष/ स्त्री से विवाह करने पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी
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राज्य सरकार की दिव्यांग सबलीकरण की घोषणा और योजनाएं कागजों में सिमट कर रह जाती हैं। सरकार ने कई घोषणाएं कर रखी हैं, लेकिन इनको धरातल पर नहीं उतारा गया। ऐसे में दिव्यांगजन लाचार और बेबस महसूस करते हैं।

डॉ. हेमंत भाई गोयल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दिव्यांग अधिकार महासंघ