
जयपुर। सरकार रविवार को सेवारत डॉक्टरों से हुई वार्ता में देर शाम तक नतीजा नहीं निकाल सकी। बात दो माह बाद मांगों को पूरा करने के लिखित आश्वासन पर अटक गई। पहले तो चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ इसके लिए तैयार नहीं थे, फिर देर रात 2:30 बजे सराफ के आवास पर लिखित आश्वासन पर सहमति बनी लेकिन सेवारत चिकित्सक संघ के पदाधिकारी समझौते पर हस्ताक्षर के लिए मौजूद नहीं थे। मौजूद अन्य चिकित्सकों ने संघ पदाधिकारियों की अनुपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस स्थिति में वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद सरकार ने रेस्मा लागू रखा। पूरे दौर के बीच ऐसा मौका भी आया जब सराफ एक कार्यक्रम में सम्मान करवाने के लिए निकल गए।
सराफ ने चिकित्सकों के खिलाफ उचित कार्रवाई के भी आदेश दिए। बैठक में चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव वीनू गुप्ता व ग्रह विभाग के प्रमुख शासन सचिव दीपक उप्रेती मौजूद थे। इससे पहले शाम 4 बजे हुई बैठक में भी बात बेनतीजा ही रही थी। जिसमें डॉक्टरों ने दो महीने का लिखित आश्वासन मांगा। लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी। अब करीब 20 हजार भर्ती मरीज और एक लाख ओपीडी मरीज सोमवार को चिकित्सकों की गैरहाजिरी में परेशान होंगे।
उपचुनाव का दिया था हवाला... जबकि चुनाव वाली जगहों 12 जिलों के डॉक्टर लगाए
डॉक्टरों से हुई वार्ता में सराफ ने उपचुनाव का हवाला देते हुए दो महीने का समय मांगा। जबकि कुछ दिन पहले सरकार उपचुनाव होने के बावजूद तीन उपचुनाव वाले क्षेत्रों में 12 जिलों से डॉक्टर हटाकर लगा चुकी है।
परेशानी क्या है...आखिर लिखित में क्यों नहीं
जैसे ही डॉक्टर्स की लिखित में आश्वासन की मांग आई, चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव अचानक यह कहते हुए चले गए कि डॉक्टर उनकी सुनना ही नहीं चाहते। इधर चिकित्सकों का कहना है कि जब सरकार दो महीने में मांगों का समाधान का आश्वासन दे रही है तो लिखित में देनें में क्या परेशानी है। ऐसा नहीं कर सरकार अपनी मंशा जाहिर कर रही है।
मुखिया से बात करने में 4 दिन
सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी ने कहा, हम ऐसे मंत्री से वार्ता कर रहे हैं, जिन्हें मुखिया से बात करने में 4 दिन लग गए।
कहा था, ऐसी मांग जनहित में नहीं
शाम को सराफ ने कहा था, एक पारी की मांग को हम किसी भी हाल में नहीं मानेंगे, यह जनहित में नहीं है। लिखित आश्वासन की बात बेतुकी है।
...10 हजार इस्तीफे
डॉक्टरों ने रविवार को ऐलान किया था कि वे सोमवार से काम नहीं करेंगे। सोमवार को दस हजार डॉक्टर इस्तीफे देंगे। वहीं, 7वें वेतनमान की विसंगति दूर करने की मांग पर आयुष डॉक्टर 7-8 नवंबर को अवकाश पर जाएंगे।
इनके विरोध का भी किया था सामना
हाल ही में कोटा में हुई बैठक में चिकित्सा मंत्री को अपने ही विधायकों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा था।
Updated on:
06 Nov 2017 09:32 am
Published on:
06 Nov 2017 07:58 am
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