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Doctors Strike: हड़ताल के कारण बिगड़े हालात- प्रदेशभर के मरीजों को करना पड़ रहा मुश्किलों का सामना

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मरीजों की मुसिबत बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी ज्यादा खराब हो गई है।

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जयपुर

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Punit Kumar

Nov 08, 2017

doctors strike

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के तीसरे दिन जारी रहने से प्रदेश भर में मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रहा है। डॉक्टरों की सरकार से वार्ता विफल होने के बाद जहां डॉक्टर्स अपने आंदोलन को उग्र रूप देने में जुट गए हैं वहीं सरकार भी अब हड़ताली डॉक्टरों के इस रवैये पर सख्त होती दिख रही है। बावजूद इसके डॉक्टरों की हड़ताल से प्रदेश भर में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों को छोड़कर अन्य अस्पतालों, डिस्पेंसरी, सीएचसी और पीएचसी में हालात काफी बिगड़ गए हैं।

सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मरीजों की मुसिबत बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी ज्यादा खराब हो गई है। सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में आउटडोर और इनडोर मरीजों की तादात अब ज्यादा बढ़ने लगी है। बुधवार को सेवारत चिकित्सकों के हड़ताल के कारण प्रदेश में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जबकि कई जगहों की स्थिति काफी गंभीर नजर आई। एक नजर प्रदेश के अलग-अलग जिलों डॉक्टर्स के हड़ताल से हुई परेशानियों पर....

जयपुर- राजधानी जयपुर में डॉक्टरों के हड़ताल के कारण जहां मरीजों को उचित इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, तो वहीं मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों की शरण भी लेने लगे हैं। अब मरीजों की संख्या अस्पतालों में लगातार बड़ने से स्थिति और भी विकट होती जा रही है। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था की है पर उसका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अब रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों के रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी सेवारत डॉक्टरों के समर्थन में हड़ताल की चेतावनी दे दी है। जिससे आने वाले दिनों में और भी परेशानियां बढ़ सकती है।

जोधपुर- सेवारत चिकित्सकों के हड़ताल का असर शहर में साफ दिखाई दे रहा है। यहां मेडिकल कॉलेज से अतिरिक्त चिकित्सक भेजे गए हैं। जबकि गांवों में परेशानी जस की तस है। वहीं हड़ताली डॉक्टरों को लेकर राज्य सरकार ने रिपोर्ट मांगी है। मेडिकल कॉलेज अधीनस्थ पावटा, महिला बाग जिला अस्पताल, मंडोर, चौपासनी व प्रतापनगर में 71 रेजीडेंट चिकित्सक व वरिष्ठ प्रदर्शक लगाए गए हैं। यहां 20 से 30 फीसदी मरीजों की आउटडोर बढ़ी है। साथ ही इन्हें इलाज को लेकर समस्याओं का समना करना पड़ रहा है।

कोटा- सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के तीसरे दिन अब चिकित्सा सेवाएं बिगड़ने लगी है। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज कोटा रेफर होकर आ रहे हैं जिस कारण यहां अतिरिक्त भार बढता जा रहा है। वहीं दो घंटे की रेजीडेंट की पेन डाउन हड़ताल ने व्यवस्थाओं को और अधिक बिगाड दिया। उधर रेजीडेंट के नहीं आने से सीनियर डॉक्टर्स ने ओपीडी में कमान संभाली। हड़ताल का असर अस्पतालों में साफ दिखाई दिया। मरीज इधर से उधर भटकते रहे वहीं कई रोगियों को कुछ दिन बाद आने की तारीख दे दी गई। जबकि जेके लोन में पिछले 48 घंटों में 5 बच्चों की मौत हो गई। बुधवार को बच्चों की मौत में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने हंगामा कर दिया।

उदयपुर- शहर में रेजिडेंट यूनियन ने भी आरएनटी मेडिकल कॉलेज परिसर के एमबी और जनाना हॉस्पिटल में सुबह 9 से 11 बजे के बीच हड़ताल की। नारेबाजी के बाद डॉक्टर्स ने कार्य बहिष्कार किया। इधर, हड़ताल के बीच मरीजों को उपचार का रास्ता नहीं मिला। असुविधा में मरीजों का समय कुछ समय के लिए ठहर गया। इधर, स्पेशलिस्ट प्रोफ़ेसर की ओर से आज समय पर पहुँचकर डयूटी आवर्स में मरीजों की सुध लेकर कुछ राहत पहुंचाने के प्रयास किए। लेकिन ये व्यवस्था ऊँट के मुँह में जीरा साबित हुई।

नहीं किया जा रहा है भर्ती, टाले जा रहे हैं ऑपरेशन-

प्रदेश के अस्पतालों में स्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही है। अस्पतालों में ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। भर्ती होने वालों मरीजों की संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है। एेसे में रीज निजी अस्पताल तथा प्रदेश के बाहर के अस्पतालों में उपचार के लिए जा रहे हैं।

हड़ताल पर डॉक्टरों के दो फाड-

चिकित्सा मंत्री से मंगलवार रात को हुई वार्ता के बाद सेवारत चिकित्सकों के दो गुट बन गए। वार्ता में भी यह बात सामने आई और बाद में खुद मंत्री ने इसकी पुष्टि की कि डॉक्टर चाहते हैं हड़ताल खत्म हो पर उनका अध्यक्ष चाहता है कि हड़ताल जारी रहे। बाद में कुछ चिकित्सक नेताओं ने बताया कि अगर चिकित्सक संघ के अध्यक्ष ने हड़ताल खत्म नहीं की तो वे काम पर लौट आएंगे।

खुले हैं वार्ता के द्वार-

डॉक्टरों के हड़ताल को लेकर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा है कि राज्य सरकार सेवारत चिकित्सकों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर है एवं सभी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। सेवारत चिकित्सक संघ के साथ वार्ता के द्वार खुले हुए हैं एवं संघ के प्रतिनिधि किसी भी समय आकर चर्चा कर सकते हैं। चिकित्सा विभाग मरीजों के उपचार के प्रति गंभीर है एवं सेवारत चिकित्सकों की अनुपस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई है।

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