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Dog Shelters in Rajasthan : पूरे राजस्थान से खत्म होगा ‘खतरनाक’ डॉग्स का खौफ! सरकार ने बनाया ये मेगा प्लान

राजस्थान के सभी शहरों में खुलेंगे हाईटेक डॉग शेल्टर्स, स्वायत्त शासन विभाग ने शुरू की तैयारियां, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बजट में बड़ा प्रावधान, बदल जाएगी मरुधरा की सूरत।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

•

Updated: 22 May 2026, 10:46 AM IST

Dog Shelters - AI Image

Dog Shelters - AI Image

राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश के शहरी बुनियादी ढांचे को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक अभियान का खाका तैयार कर लिया है। अब प्रदेश के किसी भी शहर की मुख्य सड़कों, पार्कों या सार्वजनिक स्थानों पर आवारा श्वानों का खौफ देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि सरकार इन सभी श्वानों के लिए प्रदेशव्यापी स्तर पर स्थायी और सर्वसुविधायुक्त डॉग शेल्टर्स बनाने जा रही है। इस बड़े कदम के पीछे देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के वो कड़े और स्पष्ट निर्देश हैं, जिनमें सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने और आवारा पशुओं के पुनर्वास की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इसे केवल एक कानूनी औपचारिकता न मानकर, मानवीय आधार पर हल करने के लिए सीधे राज्य के बजट में इसके निर्माण के लिए एक बड़ी वित्तीय राशि का प्रावधान कर दिया है।

तैयारियां शुरू, जल्द बनेगा एक्शन प्लान

स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन ने इस मेगा प्रोजेक्ट के प्रशासनिक पहलुओं पर से पर्दा उठाते हुए बताया कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गाइडलाइंस का अध्ययन करके पूरे प्रदेश के लिए एक कस्टमाइज्ड ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इस प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है।

बजट में विशेष राशि का प्रावधान: सचिव रवि जैन के अनुसार, राज्य सरकार ने इस बार के बजट में विशेष रूप से डॉग शेल्टर्स के निर्माण, उनके संचालन और श्वानों के रखरखाव के लिए राशि का स्पष्ट प्रावधान किया है, जिससे फंड की कोई कमी नहीं आएगी।

सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, शहरों के व्यस्त चौराहों, उद्यानों, अस्पतालों और रिहायशी कॉलोनियों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा श्वानों को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से हटाकर इन नवनिर्मित शेल्टर्स में शिफ्ट किया जाएगा।

जल्द बुलाई जाएगी रिव्यू मीटिंग: इस योजना को बिना किसी देरी के लागू करने के लिए जल्द ही प्रदेशभर के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) व आयुक्तों की एक हाई-लेवल बैठक जयपुर में बुलाई जा रही है।

आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर और उदयपुर जैसे बड़े महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक, पिछले कुछ समय में आवारा श्वानों के हमले की घटनाओं में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। आए दिन पार्कों में खेलने वाले बच्चों और रात के समय ड्यूटी से लौटने वाले दुपहिया वाहन चालकों के पीछे श्वानों के दौड़ने से गंभीर हादसे हो रहे थे।

पशु प्रेमियों और आम नागरिकों के बीच अक्सर इस मुद्दे को लेकर टकराव की स्थिति बनी रहती थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश एक आदर्श समाधान बनकर सामने आया है, जहां श्वानों के प्रति क्रूरता भी नहीं होगी और इंसानी बस्तियां भी सुरक्षित रह सकेंगी।

कैसा होगा नए डॉग शेल्टर्स का इंफ्रास्ट्रक्चर?

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्वायत्त शासन विभाग जिन डॉग शेल्टर्स का निर्माण करवाने जा रहा है, वे केवल चारदीवारी वाले साधारण बाड़े नहीं होंगे। उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक मापदंडों पर तैयार किया जा रहा है।

प्रस्तावित डॉग शेल्टर्स: इंफ्रास्ट्रक्चर-संचालन मॉडल

शेल्टर का मुख्य हिस्सा (Components)उपलब्ध सुविधाएं (Facilities Provided)मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली (Key Objective)
मेडिकल एवं वैक्सीनेशन विंगचौबीस घंटे वेटनरी डॉक्टरों की उपलब्धता, एंटी-रेबीज टीके और प्राथमिक चिकित्सा किट।शेल्टर्स में आने वाले सभी श्वानों का अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण और रेबीज मुक्त बनाना।
एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटरअत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और नसबंदी (Sterilization) की आधुनिक मशीनें।मानवीय और वैज्ञानिक तरीकों से शहरों में श्वानों की आबादी को नियंत्रित करना।
ओपन रेस्क्यू एंड फीडिंग एरियाश्वानों के दौड़ने-भागने के लिए खुला सुरक्षित अहाता और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था।श्वानों को तनाव मुक्त माहौल देना ताकि उनका व्यवहार हिंसक न हो सके।
डिजिटल ट्रैकिंग और डेटाबेसहर शहर के शेल्टर के श्वानों का डिजिटल रिकॉर्ड और जियो-टैगिंग की सुविधा।किस इलाके से कितने श्वान लाए गए और कितनों का इलाज हुआ, इसका पारदर्शी डेटा रखना।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और राजस्थान सरकार का तालमेल

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि राजस्थान सरकार इसमें स्थानीय सामाजिक संस्थाओं (NGOs) और पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board) को भी भागीदार बनाने जा रही है। सचिव रवि जैन ने साफ किया है कि इन शेल्टर्स का प्रबंधन पूरी तरह से संवेदनशीलता के साथ किया जाएगा।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का पालन: श्वानों को पकड़ने से लेकर उन्हें शेल्टर होम में रखने तक, 'प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट' के सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

जनभागीदारी से संचालन: कई शहरों में स्वयंसेवी संस्थाएं और डॉग लवर्स इन शेल्टर्स को गोद ले सकेंगे, जिससे सरकारी तंत्र के साथ-साथ आम जनता का जुड़ाव भी इस मानवीय कार्य से सुनिश्चित हो सकेगा।

शहरी विकास में मील का पत्थर: राजस्थान देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है जो अपने बजट में विशेष रूप से पशु पुनर्वास और शहरी सुरक्षा के लिए इस तरह का एक डेडिकेटेड और बड़ा ढांचागत बजटीय प्रावधान लागू कर रहे हैं।

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