
आपकी एक गलती आपको पूरी जिंदगी की कमाई को नुकसान पहुंचा सकती है। आपको कंगाल बना सकती है। आपको चौराहे पर लाकर खड़ा कर सकती है। सिर्फ एक गलती। क्यूआर कोड किस तरह से आपको कंगाल बना सकता है। इसका अंदाजा तक आपको नहीं है। ऐसे में आपको हम बता रहे हैं कि किस तरह कंगाल होने से बचा जा सकता है।
दरअसल,देश में पिछले एक साल में यूपीआई से भुगतान में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब लोगों ने नकदी ले जाना काफी कम कर दिया है। खुल्ले पैसे के झंझट से बचने के लिए सब्जी, किराना, डेयरी, रिक्शा-ऑटो आदि में 10-20 रुपए के छोटे पेमेंट भी क्यूआर कोड के माध्यम से ही कर रहे हैं।
क्यूआर कोड स्कैन करने पर पेमेंट संबंधित ऐप से लिंक्ड बैंक खाते से ही सीधा कटता है न कि ई-वॉलेट से। हर बार जब खाते से राशि कटती है तो बैंक की ओर से व्यक्ति को मोबाइल पर मैसेज भेजा जा रहा है। कई बैंक तो खाते में शेष बैलेंस की जानकारी भी हर ट्रांजेक्शन पर लोगों को भेज रहे हैं। इसी का फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं।
दरअसल, स्मार्टफोन में मौजूद कई एप्लीकेशन्स निजी डेटा पर भी नजर रखते हैं। उदाहरण के तौर पर कॉन्टेक्ट डिटेल, मैसेज, कैमरा, फोटो इत्यादि। जब बैंक की ओर से बार-बार खाते में बैलेंस का मैसेज आता है तो इन ऐप्स के माध्यम से साइबर जालसाज मैसेज तक भी पहुंच जाते हैं। उन्हें आपके बैंक खाते में आसानी से बैलेंस का पता चल सकता है।
ऐसे बचें: ऑनलाइन भुगतान करें मगर सावधानी से
लोग यों हुए साइबर अपराध का शिकार
केस़ 1: क्लिक करते ही कटे दो हजार रुपए
मानसरोवर निवासी रोहिताश शर्मा ने बताया, कुछ दिन पहले फोन पर मैसेज आया कि किसी ऐप पर एक हजार रुपए के भुगतान का ऑटो डिडक्शन (अपने आप पैसा कटेगा) होगा। इसे रोकने के लिए और बैंक को रिपोर्ट करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। जैसे ही उस लिंक पर क्लिक किया तो कुछ ही देर बाद खाते से दो हजार रुपए कटने का मैसेज आया। आनन-फानन में बैंक खाते से ई-बैकिंग को रोका। कार्ड को ब्लॉक करवाया।
केस 2: क्लिक नहीं किया तो बचे पैसे
परकोटा निवासी प्रवीण गुप्ता को भी ऑटो डिडक्शन का मैसेज प्राप्त हुआ। हालांकि, उन्होंने जल्दबाजी में किसी लिंक पर क्लिक नहीं किया। उन्होंने किसी भी सेवा के लिए ऑटो डिडक्शन को शुरू ही नहीं कर रखा है और न ही ऐसी कोई कटौती कभी हुई। इस साइबर फ्रॉड को समझते हुए लिंक पर क्लिक नहीं किया।
मैसेज पढ़कर हो सकती है ठगी
आमतौर पर लोगों को पता ही नहीं होता है कि उन्होंने कितने एप्लीकेशन्स को कितने एक्सेस दे रखे हैं। कई ऐप्स आपके मैसेज को स्वत: पढ़ते हैं और सीधे ओटीपी ले लेते हैं। एंड्राॅइड फोन में ऐसे एप्लीकेशन्स को तोड़ना साइबर जालसाजों के लिए बेहद आसान होता है। आपके मैसेज पढ़कर वे साइबर ठगी कर सकते हैं। इससे बचने के लिए अपने फोन की सेटिंग्स पर ध्यान रखें। यदि आप इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करते हैं तो अपने फोन को पब्लिक वाईफाई, हॉटस्पॉट से कनेक्ट न करे। साथ ही फोन में डवलपर मोड को हमेशा ऑफ रखें। थर्ड पार्टी एप्लीकेशन को हमेशा ऑफ रखें। फोन को कभी भी पब्लिक चार्जिंग पॉइंट पर चार्ज करने से बचें।
- आयुष भारद्वाज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ
Published on:
11 Jan 2023 09:09 am
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