
जयपुर। हर माता-पिता अपने अरमानों के साथ बेटी की धूमधाम से शादी करते हैं और उपहार के रूप में उसे दहेज का सामान देते हैं। इससे प्यारी बिटिया को मिला सामान गृहस्थ जीवन में आगे काम आ सके। लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते दहेज का सामान अब महिला थानों की चौखट पर कबाड़ बनता जा रहा है। राजधानी के बनीपार्क महिला थाना परिसर में भी दहेज का सामान खराब हो रहा है।
सूचना के बाद भी नहीं आते लेने
पुलिस सूत्रों का कहना है कि दहेज में मिला सामान थाने में जब्त करके लाया जाता है। उसके बाद पीड़ित पक्ष को सूचना दे जाती है। लेकिन सामान को छुड़ाने नहीं आते हैं। इसके चलते थाना परिसर में बाहर पड़ा सामान खराब हो जाता है।
बारिश व तेज धूप में खराब हो जाता है सामान
पुलिसकर्मी भी दहेज के सामान को लेकर चिंतित रहते हैं। लेकिन जब्त सामान को रखने के लिए उनके पास भी उतनी जगह नहीं मिल पाती है। तेज धूप व बारिश के दिनों में सामान थाना परिसर में बाहर धूल फांकता रहता है। इनमें बेशकीमती कूलर, पंखे, अलमारी, बक्से व मिरर समेत अन्य सामान जंग व कबाड़ में बदल रहा है।
केस कमजोर होने का डर
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पीड़ित पक्ष केस कमजोर होने के डर से दहेज का सामान छुड़ाने नहीं आ पाता हैं। पीड़ितों का मानना है कि सामान छुड़ाते ही केस कमजोर हो जाएगा और इसका लाभ आरोपित को मिल जाएगा। इसके चलते थाने में ही दहेज का सामान पड़ा रहना उचित समझते हैं। दरअसल, दहेज को लेकर न्यायालय में कई मामले विचाराधीन हैं। दहेज के मामलों में जितना वक्त लगता है उतने में सामान थाना परिसर में पड़ा-पड़ा खराब हो जाता है। कबाड़े में बदलने के बाद पीड़ित दहेज के सामान को लेने नहीं आते हैं। इससे पुलिसकर्मियों की भी मशक्कत बढ़ जाती है।
Published on:
03 Jul 2018 06:33 pm
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