
Gulab Kothari Article : करवट बदल रही माया : हर युग परिवर्तन के साथ माया करवट बदलती दिखाई पड़ती है। सीता उतनी आक्रामक नहीं रही जितनी कि द्रौपदी। आज माया केंद्र का स्थान ही मानो बदलने लगी है। शरीर का मोह भी बढ़ा है और शरीर ही स्वच्छन्दता की अभिव्यक्ति का नया साधन हो चला है। शरीर से माता-पिता का स्वामित्व हटने लगा है। नया नैरेटिव ‘यह मेरा शरीर है-कुछ भी करूं’ चल पड़ा।
Published on:
04 Apr 2026 07:01 pm
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