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गजबः इंडियन आर्मी ने मिर्च को बनाया हथियार, उपद्रवियों का हो जाता है इतना बुरा हाल

लाल मिर्च न केवल सब्जी में स्वाद का तड़का लगा रही है, बल्कि भारतीय सेना के लिए आतंकियों के विरुद्ध ऑपरेशन में भी उपयोगी साबित हो रही है। दरअसल, असम स्थित तेजपुर में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला में नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में पाई जाने वाली भूत झोलकिया मिर्च से चिली हैंड ग्रेनेड और स्प्रे बनाया जा रहा है।

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देवेंद्र सिंह राठौड़

लाल मिर्च न केवल सब्जी में स्वाद का तड़का लगा रही है, बल्कि भारतीय सेना के लिए आतंकियों के विरुद्ध ऑपरेशन में भी उपयोगी साबित हो रही है। दरअसल, असम स्थित तेजपुर में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशाला में नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में पाई जाने वाली भूत झोलकिया मिर्च से चिली हैंड ग्रेनेड और स्प्रे बनाया जा रहा है। सेना इसका इस्तेमाल उपद्रवियों की भीड़ को तितर-बितर करने और आंतकियों एवं उग्रवादियों को उनके सुरक्षित स्थान से बाहर निकालने में कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इसका जम्मू कश्मीर में उपयोग किया जा चुका है। डीआरडीओ की ओर से तैयार मिर्च का यह स्प्रे बैग या पर्स में आसानी से रखा जा सकता है, जिसका इस्तेमाल महिलाएं आत्मरक्षा में कर सकती हैं।

2016 में शुरू किया इस्तेमाल
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने बातचीत में बताया कि वर्ष 2009 में इस मिर्च से हैंड ग्रेनेड व स्प्रे बनाना शुरू किया, जो वर्तमान में भी बरकरार है। वर्ष 2016 से पैलेट गन में भी इसका उपयोग किया जाने लगा है। नागालैंड सरकार को इस मिर्च के लिए वर्ष 2008 में जीआई टैग यानी ज्योग्राफिकल इंडेक्स हासिल हो चुका है। असम का तेजपुर, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम का इलाका भूत झोलकिया मिर्च की खेती के लिए मशहूर है। बताया जा रहा है कि यह मिर्च लाल रंग की होती है, लेकिन कभी-कभी पकने के बाद इसका रंग नारंगी और चॉकलेटी हो जाता है।


इसलिए मिर्च से बना हथियार
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के मुताबिक भूत झोलकिया मिर्च का आकार छह से आठ सेंटीमीटर होता है। इसमें ओलियोरेजिन तत्व पाया जाता है, यह दुनिया की दूसरी सबसे तीखी मिर्च है। तीखापन के कारण इसे वर्ष 2007 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में शामिल किया गया है।

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ऐसे किया जा रहा उपयोग
यह मिर्च इतनी तीखी है कि इसका हल्का सा स्वाद जीभ पर आते ही व्यक्ति अजीब व्यवहार करने लगता है। इस मिर्च का पाउडर ग्रेनेड और स्प्रे बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसको उपद्रवियों के ऊपर दागते ही आंखों में बहुत तेज जलन होती है और दम घुटने लगता है। करीब छह से आठ घंटे तक इसका असर रहता है। कुछ देर के लिए उपद्रवी अपने स्थान पर स्थिर हो जाता है और किसी प्रकार की हरकत नहीं कर पाता।

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