
जयपुर मेट्रो। पत्रिका फाइल फोटो
Driver-less Jaipur Metro: दिल्ली-मुंबई मेट्रो की तरह जयपुर मेट्रो भी जल्द बिना ड्राइवर के दौड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन के जरिए संभव होगा। इस तकनीक से मेट्रो की स्पीड बढ़ेगी और ऑपरेटर का तनाव भी कम होगा।
इस तकनीक के तहत मेट्रो ऑपरेटर केवल पूरी निगरानी रखेंगे। मेट्रो को मौजूदा सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। पहले भी मेट्रो को रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक ऑटो मोड पर चलाया जा चुका है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण को स्वीकृति दे दी है। इस चरण में 13,037.66 करोड़ रुपए की लागत से 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर बनाया जाएगा।
ये कॉरिडोर प्रहलादपुरा (सीतापुरा) से तोड़ी मोड़ तक जाएगा, जिसमें कुल 36 स्टेशन होंगे। इस परियोजना को भारत सरकार और राजस्थान सरकार की 50:50 हिस्सेदारी से राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (आरएमआरसीएल) द्वारा लागू किया जाएगा।
जयपुर मेट्रो फेज-2 में कुल 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें से 34 स्टेशन एलिवेटेड और 2 स्टेशन अंडरग्राउंड होंगे। एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास भूमिगत स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को सीधे मेट्रो से हवाई अड्डे तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी । यह नया कॉरिडोर मौजूदा मेट्रो लाइन से इंटरचेंज और फीडर सेवाओं के माध्यम से जुड़कर पूरे शहर में एकीकृत मेट्रो नेटवर्क तैयार करेगा ।
मेट्रो का यह नया मार्ग सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, वीकेआईए, जयपुर हवाई अड्डा, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ेगा । यह मार्ग पहले चरण से इंटरचेंज के जरिए जुड़ेगा, जिससे पूरे शहर में एकीकृत मेट्रो नेटवर्क तैयार होगा ।
पहले चरण में अभी रोजाना करीब 60 हजार यात्री सफर करते हैं । 11.64 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के बाद दूसरे चरण के शुरू होने पर यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है । इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। इस परियोजना को सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है । इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, प्रदूषण घटेगा और शहरवासियों व पर्यटकों के लिए आवागमन आसान होगा ।
Published on:
11 Apr 2026 12:29 pm
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