
एक नशा छुड़वाने के नाम पर युवाओं को लगा रहे दूजी लत
जयपुर. तम्बाकू छोडऩे का उपाय बताकर शहर में लोगों को ई सिगरेट की नई लत लगाई जा रही है। ई सिगरेट में भी कैंसर के खतरे वाले तत्व होते हैं लेकिन यह बेरोकटोक बेची जा रही है। यहां तक कि बच्चों-युवाओं को भी थमाई जा रही है।
तंबाकू से होने वाली मौतों और कैंसर के मामले में देश में राजस्थान की स्थिति चिंताजनक है। सिगरेट से कैंसर और मौत का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसे कम करने के नाम पर अब ई सिगरेट का कारोबार फल-फूल रहा है। राजधानी के युवाओं को इसकी लत लगाकर इस कारोबार से जुड़े लोग अपनी जेबें भरने में जुटे हैं। पिछले दिनों खुद स्वास्थ्य विभाग ने भी इस स्थिति पर चिन्ता जताई थी। इसके बावजूद इस पर लगाम की कार्रवाई नहीं हो रही है। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि मॉल्स से लेकर पान-तंबाकू की दुकान तक ई सिगरेट उपलब्ध है। बाजार में 500 रुपए में चार्जेबल सिगरेट भी बेची जा रही है।
यों चल रहा कारोबार
मालवीयनगर में गौरव टावर के पीछे एक पान की दुकान पर पत्रिका टीम ने ई सिगरेट मांगी तो उसने आगे वाली दुकान की तरफ इशारा किया। वहां रेलवे लाइन के सहारे एक दुकान पर दुकानदार ने ई सिगरेट दे दी। उसके फायदे गिनाने लगा, उपयोग का तरीका भी बताया। उसके यहां 200 से 500 रुपए तक की ई सिगरेट के साथ विभिन्न प्रकार के हुक्के भी थे।
गोपालपुरा बायपास, टोंक फाटक, लालकोठी, राजस्थान विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्रों में विद्यार्थियों के मद्देनजर ऐसे उत्पाद नहीं बिकने चाहिए लेकिन वहां भी कुछ दुकानों पर ई सिगरेट 200 से 950 रुपए तक में मिल रही थी। सांगानेर एयरपोर्ट के पास भी ई सिगरेट बिक रही थी।
तंबाकू से निजात की आड़ बेरोकटोक बिक रही ई-सिगरेट
फ्लेवर भी एक तरह का नशा
विशेषज्ञों की मानें तो कुछ फ्लेवर वाली ई सिगरेट ही ऐसी हैं जो सिगरेट छोडऩे में काम आ रही हैं। जबकि कई फ्लेवर भी युवाओं को नशे का आदी बना रहे हैं। ई सिगरेट के जरिए 10 से 20 मिलीग्राम तक निकोटिन शरीर में जाता है।
रु 500 में चार्जेबल सिगरेट भी बेची जा रही है बाजार म
10-20 मिलीग्राम तक निकोटिन शरीर में जाता है ई सिगरेट के जरिए
Published on:
13 Jun 2018 11:56 am
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