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उस दिन धरती पर खत्म हो जाएगा जीवन

हम आप जो भी चीज़ देख रहे हैं, उसका अतीत बन जाना तय है. पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व भी इसमें शामिल है. एक दिन ये भी अतीत बन जाएगा. लेकिन कब? आपको भले यकीन ना हो, लेकिन जीवाश्मों के अध्ययन के मुताबिक पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को करीब 3.5 अरब साल हो चुके हैं. इतने समय में पृथ्वी ने कई तरह की आपदाएँ झेली हैं - जम जाना या अंतरिक्ष की चट्टानों का टकराना, प्राणियों में बड़े पैमाने पर ज़हर का फैलना, जला कर सब कुछ राख कर देने वाले रेडिएशन।

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जयपुर

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Neeru Yadav

Sep 13, 2019

उस दिन धरती पर खत्म हो जाएगा जीवन

उस दिन धरती पर खत्म हो जाएगा जीवन

हम आप जो भी चीज़ देख रहे हैं, उसका अतीत बन जाना तय है. पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व भी इसमें शामिल है. एक दिन ये भी अतीत बन जाएगा. लेकिन कब? आपको भले यकीन ना हो, लेकिन जीवाश्मों के अध्ययन के मुताबिक पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को करीब 3.5 अरब साल हो चुके हैं. इतने समय में पृथ्वी ने कई तरह की आपदाएँ झेली हैं - जम जाना या अंतरिक्ष की चट्टानों का टकराना, प्राणियों में बड़े पैमाने पर ज़हर का फैलना, जला कर सब कुछ राख कर देने वाले रेडिएशन। ज़ाहिर है यदि जीवन को ऐसा भीषण ख़तरा पैदा हो तब भी पृथ्वी से पूरी तरह से जीवन का अस्तित्व ख़त्म नहीं हो पाएगा. लेकिन पृथ्वी पर इस दुनिया के खत्म होने की आशंका तो है ही...शायद पूरी पृथ्वी बंजर भूमि में तब्दील हो जाएगी. लेकिन क्या हो सकता है? कब तक रहेगा पृथ्वी पर जीवन? आइये आपको बताते हैं पृथ्वी यानि हमारी इस धरती पर जीवन की कब तक की संभावनाएं वैज्ञानिकों ने जताई हैं
आशंका है कि पृथ्वी पर जीवन ज्वालामुखियों के विस्फोट से 25 करोड़ साल में खत्म हो जाएगा. ऐसा होने पर पृथ्वी पर मौजूद 85 फ़ीसदी जीव नष्ट हो जाएंगे जबकि 95 फ़ीसदी समुद्री जीवों का अस्तित्व नष्ट हो जाएगा. इस दौरान ज्वालामुखी से जो लावा निकलेगा, वो ब्रिटेन के आकार से आठ गुना बड़ा होगा.
ये सामान्य जानकारी है कि पृथ्वी पर से डायनासोर प्रजाति का एस्टेरॉइड के टकराने के कारण अंत हुआ था. अगर एक भारी-भरकम एस्टेरॉइड के टकराने से विशालकाय डायनासोर लुप्त हो सकते हैं तो फिर एक दूसरी टक्कर से पृथ्वी पर जीवन भी नष्ट हो सकता है.हालांकि ये काफी हद तक इस पर निर्भर करेगा कि क्षुद्र ग्रह टकराता कहां है? कुछ बड़े क्षुद्र ग्रह पृथ्वी से टकराए ज़रुर हैं लेकिन उससे पृथ्वी पर जीवन ख़त्म नहीं हुआ.
पृथ्वी का केंद्र जमने से भी जीवन पूरी तरह ख़त्म हो सकता है. इस विषय पर 2003 में हॉलीवुड में 'द कोर' नाम से फ़िल्म बन चुकी हैएक्टिव कोर नहीं होने से पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र ख़त्म हो जाएगा और इससे पृथ्वी का पूरा जीवन ख़तरे में आ सकता है.कभी मंगल के पास अपना चुंबकीय क्षेत्र होता था जिसे उसने खो दिया. पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के कमज़ोर होने की ख़बरें भी पिछले दिनों आती रही हैं. लेकिन इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं हैं. क्योंकि ये कमी दिशा बदलने के चलते हुई है,
अरबों साल से हमारा ग्रह सोलर सिस्टम में सूर्य के इर्द-गिर्द चक्कर लग रहे हैं. लेकिन अगर कोई तारा नज़दीक आ जाए तो क्या होगा. न्यूयार्क की रॉचेस्टर यूनिवर्सिटी के एरिक मामेजक के नेतृत्व में फ़रवरी, 2015 में हुए अध्ययनों में बताया गया है कि ऐसा संभव है और ये भी कहा गया है कि ये जल्दी हो सकता है.
सिएटल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन के पीटर वार्ड के मुताबिक जीवन को सबसे ज़्यादा ख़तरा ख़ुद से ही है. करीब 2.3 अरब साल पहले वायुमंडल में काफी आक्सीजन का प्रवेश फोटोसिंथेटिक लाइफ़ के चलते हुआ. आक्सीज़न की इतनी मात्रा के चलते काफी जीवन नष्ट हो गया.वार्ड के मुताबिक सूर्य गर्म हो रहा है और पृथ्वी का तापमान भी बढ़ रहा है. इसके चलते पठार और वायुमंडल के कार्बन डायक्साइड के बीच केमिकल रिएक्शन भी बढ़ रहा है.कार्बन डायक्साइड के कम होने से पौधे फोटोसिंथेसिस नहीं कर पाएंगे. पौधों को खत्म होने से जीवन भी खत्म हो जाएगा.
अगर उपर की आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं तो सूर्य के चलते जीवन समाप्त होगा. सूर्य ही पृथ्वी पर जीवन की ऊर्जा के तौर पर प्रकाश भेजता है, लेकिन हमेशा उसका रिश्ता दोस्ताना नहीं रहने वाला है.हमने देखा है कि सूर्य लगातार गर्म हो रहा है. एक समय ऐसा आएगा कि पृथ्वी के समुद्र सूख जाएंगे. ग्रीन हाउस इफेक्ट के चलते तापमान भी बढ़ेगा. ये एक सब एक अरब साल में शुरू हो जाएगा.लेकिन यहीं सब कुछ खत्म नहीं होगा. अब से ठीक 5 अरब साल बाद सूर्य फैलना शुरू करेगा. एक सूजे हुए तारे की शक्ल में यह 7.5 अरब साल में पृथ्वी को निगल लेगा.