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वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बनेगा मास्टर प्लान

Ecologically sensitive zone : देश के नेशनल पार्क और वन्यजीव अभ्यारण्यों में वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए ईको सेंसेटिव जोन के तहत होने वाली गतिविधियों के लिए मास्टर प्लान बनाने की कवायद चल रही है।  

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ecologically sensitive zone at nahargarh Jamwaramgarh World animal day

वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बनेगा मास्टर प्लान

जयपुर
Ecologically sensitive zone : देश के नेशनल पार्क और वन्यजीव अभ्यारण्यों में वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए ईको सेंसेटिव जोन के तहत होने वाली गतिविधियों के लिए मास्टर प्लान बनाने की कवायद चल रही है। जयपुर में नाहरगढ़ और जमवारामगढ वन्य जीव अभयारण्य के ईको-सेंन्सिटिव जोन(ई.एस.जोन) में प्रतिबंधित गतिविधियों की रोकथाम के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस प्लान में अनुमत गतिविधियों के नियंत्रण और प्रोत्साहक गतिविधियों के संचालन की प्रक्रिया निर्धारण को भी शामिल किया जाएगा। जिला कलक्टर जगरूप सिंह यादव की अध्यक्षता में इस सम्बन्ध में कलक्ट्रेट में मॉनिटारिंग कमेटी की बैठक हुई। इस दौरान कलक्टर ने बताया कि दोनों ईको-सेंन्सिटिव जोन की अधिसूचना केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जारी की थी। कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि ईको सेंसेटिव जोन को लेकर जारी किए गए संबंधित नोटिफिकेशन के अनुसार प्रतिबन्धित किसी भी गतिविधि का संचालन नहीं हो। जयपुर के इन दोनों ईको सेंसिटिव जोन में प्रतिबन्धित और अनुमत गतिविधियों की साझा सूची तैयार करने के लिए भी अधिकारियों को कहा है। दरअसल, ईको जोन में गतिविधियों से सम्बन्धित ज्यादातार मामले पर्यावरण एवं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से सम्बन्धित हैं। ऐसे में इन मामलों में कार्रवाई के लिए इन्हें नोडल बनाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कवायद
आपको बता दें कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिए थे कि देश के 21 राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के 10 किलोमीटर क्षेत्र को जल्द से जल्द ईको सेंसेटिव जोन घोषित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अभयारण्यों में रहने वाले पक्षियों और जानवरों की सुरक्षा के लिए दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केन्द्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ईको सेंसेटिव जोन के लिए अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के बाद अब संबंधित नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्रों में ईका सेंसेटिव जोन के लिए मास्टर प्लान बनाने की कवायद जारी है। ईको सेंसेटिव जोन के लिए वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षा में दखल उत्पन्न करने वाली गतिविधियों को रोकने और नियंत्रित करने के प्रावधान किए जाने हैं।
यहां घोषित किए गए हैं सेंसेटिव जोन
असम, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान के साथ अन्य नेशनल पार्क और वन्य जीव अभ्यारण्यों वाले क्षेत्रों को ईको सेंसेटिव जोन बनाया गया है। पर्यावरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक भारत का 30 प्रतिशत संरक्षित क्षेत्र अंतिम रूप से संवेदनशील क्षेत्र के तहत आच्छादित है। देश में 662 राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य हैं। आपको बता दें कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 में "इको-सेंसिटिव जोन" शब्द का उल्लेख नहीं है। हालांकि, अधिनियम की धारा 3 (2) (v) में यह उल्लेखित है कि केंद्र सरकार वन्य जीवों की सुरक्षा उपायों के तहत क्षेत्र में कई गतिविधियों को प्रतिबंधित कर सकती है। इसके तहत उद्योगों पर प्रतिबंध लगाने के साथ अन्य कई निर्णय लिए जा सकते हैं।