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सात सदस्यीय कमेटी करेगी पीईईओ की समस्या का समाधान

प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित किए जा रहे स्कूलों के मेंटर के रूप में काम कर रहे पीईईओ की समस्याओं का समाधान अब माध्यमिक शिक्षा की अतिरिक्त निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Dec 20, 2021

सात सदस्यीय कमेटी करेगी पीईईओ की समस्या का समाधान

सात सदस्यीय कमेटी करेगी पीईईओ की समस्या का समाधान

पीईईओ के लिए मेंटर बनकर काम करना बना परेशानी
अब सात सदस्यीय कमेटी करेगी समस्या का समाधान
जयपुर
प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित किए जा रहे स्कूलों के मेंटर के रूप में काम कर रहे पीईईओ की समस्याओं का समाधान अब माध्यमिक शिक्षा की अतिरिक्त निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। गौरतलब है कि निदेशालय ने ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित राजकीय माध्यमिक विद्यालय और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों को पंचायत रिसोर्स सेंटर और संबंध संस्था प्रध्धान को पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी यानी पीईईओ घोषित किया है। पीईईओ और उनका स्कूल संबंधित पंचायत के सभी स्कूलों के लिए बतौर मेंटर काम करता है लेकिन देखने में आ रहा है कि पीईईओ को इन स्कूलों के संचालन में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पीईईओ की समस्याओं को दूर करने के लिए ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक कमेटी का गठन किया है।
गठित की सात सदस्यीय कमेटी
समिति का अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अतिरिक्त निदेशक रचना भाटिया को बनाया गया है। जबकि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद में सयुक्त निदेशक ममता दाधीच, उपनिदेशक नादान सिंह गुर्जर, डाइट गोनेर की वरिष्ठ व्याख्याता योगेंद्र शर्मा, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ऊटंवालिया चूरू की प्रधानाचार्य सुनील कुमार शर्मा,राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय 2 जीजी श्रीगंगानगर के प्रधानाचार्य तेज प्रताप सिंह इस समिति के सदस्य होंगे। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अनुसंधान अधिकारी मोहित मान को सदस्य सचिव के रूप में समिति में शामिल किया गया है।
यह है पीईईओ के दायित्व उनके अधिकार में अब ग्राम पंचायत में आने वाले सरकारी और निजी स्कूल होंगे।

गांवों के स्कूलों की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। अपनी ग्राम पंचायत में शिक्षकों के अवकाश, शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूल की भौतिक स्थिति, नामांकन वृद्धि, ड्रॉप आउट को खत्म करना, एसएमसी पीटी,एसडीएमसी कमेटियों के अधिकार भी अब उनके पास हैं। पीईईओ के पास प्रशासनिक और अकादमिक नेतृत्व का अधिकार भी है।
इन्हें स्कूलों के लिए संदर्भ केंद्र और मार्गदर्शी स्कूल के रूप में कार्य करना होगा। अपनी ग्राम पंचायत के प्रत्येक स्कूल के सुपरविजन की जिम्मेदारी इनकी होती है। ग्राम पंचायत के प्रत्येक बच्चे का प्रवेश कराने, चिह्नीकरण और ड्रॉपआउट की रिपोर्ट इनकी होती है। स्कूलों की आवश्यकता के लिए प्रस्ताव बनाकर एसएफजीए एफएफसी और मनरेगा से स्वीकृति दिलाने के प्रयास करेंगे। शिक्षकों के अवकाश तक पीईईओ ही स्वीकृत करते हैं।
आ रही है यह परेशानी
पीईईओ के समक्ष सबसे बड़ी परेशानी इसी बात की है कि उन्हें अपने स्कूल के साथ अपनी ग्राम पंचायत के दूसरे स्कूलों को भी संभालना होता है। विद्यार्थियों की जिम्मेदारी के साथ जिला प्रशासन के काम का दायित्व भी पीईईओ को ही दिया जाता है। स्कूलों में शिक्षकों और अन्य सहायक स्टाफ की कमी के कारण इन सभी उत्तरदायित्वों को पूरा करना अब पीईईओ के लिए परेशानी बन गया है। स्कूलों में कोई कमी रहने पर उच्चाधिकारी भी उन्हें ही तलब करते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में तालबांदी जैसी समस्या भी कई बार पैदा हो जाती है। ऐसे में अब पीईईओ अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। पीईईओ की इस परेशानी को देखते हुए अब राजस्थान प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्रीमहेंद्र पांडे ने मांग की है कि पीईईओ को अधिक स्टाफ दिया जाना चाहिए। उनके अंडर जितने स्कूल हैं उसी के मुताबिक मंत्रालयिक कर्मचारियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए।


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