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प्रयासों से जन्नत बना जंगल

रेलवे ट्रेक पर यूं तो आपने सैंकड़ों रेलवे फाटक देखे होंगे। लेकिन सूरतगढ़ से अनूपगढ़ रेलवे ट्रेक पर स्थित रेलवे फाटक 1 एसी बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। यहां दो रेलवे कर्मियों के पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम ने रेलवे गुमटी की फिजां ही बदल दी है। अगाध प्रकृति प्रेम के चलते रेलवे कर्मियों ने सैंकड़ों देशी व विदेशी पेड़ पौधों से इस मामूली रेल गुमटी को जन्नत बना दिया है। रेलवे कर्मियों के तन, मन व धन से सिंचित यह रेलवे गुमटी पर्यावरण व मानव संबंधों की मिसाल पैदा करती है, वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।

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Jai Narayan Purohit

Jan 25, 2016

रेलवे ट्रेक पर यूं तो आपने सैंकड़ों रेलवे फाटक देखे होंगे। लेकिन सूरतगढ़ से अनूपगढ़ रेलवे ट्रेक पर स्थित रेलवे फाटक 1 एसी बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। यहां दो रेलवे कर्मियों के पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम ने रेलवे गुमटी की फिजां ही बदल दी है। अगाध प्रकृति प्रेम के चलते रेलवे कर्मियों ने सैंकड़ों देशी व विदेशी पेड़ पौधों से इस मामूली रेल गुमटी को जन्नत बना दिया है। रेलवे कर्मियों के तन, मन व धन से सिंचित यह रेलवे गुमटी पर्यावरण व मानव संबंधों की मिसाल पैदा करती है, वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।
वर्ष 2012 तक सूरतगढ़ से अनूपगढ़ ट्रेक पर स्थित यह रेलवे फाटक गुमटी आम रेलवे फाटकों की भांति थी। इसी वर्ष रेलवे के गेटमेन पूनमचंद उपाध्याय स्थानांतरित होकर इस रेलवे फाटक पर आए। पर्यावरण के प्रति असीम आस्था रखने वाले उपाध्याय के मन में रेलवे गुमटी को प्राकृतिक रूप से सौन्दर्यीकृत करने का विचार आया। उन्होंने इस बारे में गुमटी पर पहले से नियुक्त गेटमेन महेन्द्र कुमार से चर्चा कर उसे इस योजना के लिए तैयार किया। हालांकि भौगोलिक रूप से विषम स्थितियों के कारण यहां हरियाली का सपना बेहद मुश्किल था लेकिन प्रकृति प्रेम ने दोनों रेलवे कर्मियों को प्रोत्साहित किया। मात्र दो वर्ष में ही दोनों रेलवे कर्मियों ने अपनी मेहनत व अथक प्रयासों के दम पर इस रेल गुमटी का ऐसा प्राकृतिक कायाकल्प किया कि लोग दंग रह गए। आज यह प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल है।(नसं)
पौधे बने मुख्य आकर्षण
रेलवे गुमटी में दर्जनों प्रकार के देशी व विदेशी पेड़ व पौधे लगे हैं। लेकिन इनमें विशेष आकर्षण का केन्द्र सुगंधित एवं रंग-बिरंगे फूलों पौधे हैं। जिनकी कीमत 40 रुपए से लेकर 650 रुपए कीमत तक हैं। इनमें 400 रुपए की कीमत वाला बॉटल पॉम भी खास है। महंगे पौधों में फिकस ट्रोपेरी, यूका, फाइकस, साइकस, एरिका, बेगन वेले, एल्पीनिया, देहलिया आदि शामिल हैं। इसके अलावा पेन्जी, गुडल अंग्रेजी, मेरीगोल्ड, जेरनियम, केरमडूला, राहिल्या, गुलदाउदी, सालविया भी गुमटी की शान बढ़ा रहे हैं। दोनों कर्मचारियों के प्रकृति प्रेम से प्रोत्साहित होकर यहां सुबह घूमने के लिए आने वाले लोग भी अब इस अभियान को दो कदम आगे ले जाने के लिए सहयोग में उतर आए हैं। वहीं रेलकर्मियों की इस अनूठी प्रकृति प्रेम की मिसाल को देखकर अब अन्य रेलवे फाटकों पर नियुक्त गेटमेन भी अपने वीरान स्थान को प्रकृति की खूबसूरत छटा से सरोबार करने के लिए प्रेरित हुए हैं। (नसं)