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एलएसडी रोग के प्रकोप से निपटने के प्रयास

मवेशियों पर प्रभाव

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jaipur

एलएसडी रोग के प्रकोप से निपटने के प्रयास

जयपुर. हाल ही में खबरें आई हैं, जिनमें गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में लम्पी स्किन डिसीज (एलएसडी) के फैलने का संकेत दिया गया है। इस बात के भी शुरुआती संकेत हैं कि इसका प्रकोप भारत के अन्य हिस्सों में भी फैल रहा है। एलएसडी मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करने वाली सबसे विनाशकारी बीमारियों में से एक है। यह कैप्रीपॉक्स वायरस के कारण होने वाला एक वायरल संक्रमण है, जो गोट पॉक्स वायरस से निकटता से संबंधित है। इस रोग से प्रभावित पशुओं में तेज बुखार, सतही लिम्फ नोड्स, त्वचा के छाले या निशान, क्षीणता और कम दूध उत्पादन के लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी की मृत्यु दर उच्च है।
इन सभी का किसानों और पशुधन मालिकों पर भारी प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव पड़ता है, जो अपनी आजीविका के लिए इन जानवरों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। एलएसडी के कारण होने वाली मृत्यु दर को बचाने, रोकने और कम करने के लिए गोट पॉक्स के टीके का अधिक मात्रा में उपयोग करने के लिए सरकारी सलाह द्वारा यह निर्धारित किया गया है।
हेस्टर गोट पॉक्स के टीके का निर्माण करता है जिसे मवेशियों और भैंसों में 3 मिली प्रति खुराक के उपयोग के लिए अनुशंसित किया गया है। हेस्टर एंटीबायोटिक जैसी पूरक चिकित्सा भी बनाती है जो वर्तमान एलएसडी प्रकोप में बहुत प्रभावी और सहायक हैं। हेस्टर के पास अपने गोट पॉक्स के टीके के साथ-साथ इसके अन्य पूरक उत्पादों के पर्याप्त तैयार स्टॉक हैं। कंपनी ने प्रकोप की परिस्थिति में पूरक उत्पादों और एलएसडी के प्रतिरक्षण और रोकथाम के लिए गोट पॉक्स के टीके की अतिरिक्त मात्रा के निर्माण के लिए कमर कस ली है।