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इस दोस्ती के आगे नहीं टिकती मजहब की दीवार, ईद हो या दिवाली साथ मनाते हर त्योहार

यहां हिन्दू-मुस्लिम परिवार ईद और दिवाली मिलकर साथ मनाते हैं

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जयपुर

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Deepshikha

Jun 04, 2019

jaipur

इस दोस्ती के आगे नहीं टिकती मजहब की दीवार, ईद हो या दिवाली साथ मनाते हर त्योहार

जयपुर. हजारों साल से गंगा-जमुनी तहजीब में हिंदुस्तान का दिल और दामन इस कदर बड़ा रहा है कि इसने इस्लाम ही नहीं, दुनिया के हर मजहब के लोगों को एक जैसा दिल दिया है। पिंकसिटी के नाम से मशहूर यह शहर अपने त्योहारों के सेलिब्रेशन के चलते भी हमेशा चर्चा में रहता है। आज भी यहां हिन्दू-मुस्लिम परिवार ईद और दिवाली मिलकर साथ मनाते हैं।

दिवाली पर जहां एक ओर मुस्लिम परिवारों में पटाखे व मिठाइयां खरीद कर त्योहार को सेलिब्रेट किया जाता है। वहीं ईद के त्योहार पर हिंदू परिवारों में खरीदारी का क्रेज नजर आता है। ऐसे में ईद को लेकर शहर के हिन्दू परिवार भी उत्साहित हैं। दोस्ती की ऐसी ही मिसाल शहर में आज भी कायम है। पत्रिका प्लस ईद के मौके पर शहर के कुछ ऐसे ही लोगों की दोस्ती और भाईचारे की मिसाल को सामने ला रहा है।

हमारे लिए रोजे रखते हैं दोस्त

राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव मोअज्जम अली ने बताया कि मेरे दोस्त देवेन्द्र पारीक और राजेन्द्र सिंह शेखावत पिछले 35 साल से ईद की मुबारकबाद देने घर आते हैं। आंधी आए या तूफान आए, ये मुझे घर आकर ईद विश करना कभी नहीं भूलते। वहीं मेरे दोस्त अनंत व्यास, लोकेश कुमार सिंह, आलोक चतुर्वेदी और अखिलेश तिवारी हमारे यहां ईद की रौनक रहते हैं। सच बताउं तो ये सभी दोस्त मेरी असली कमाई है। इन दोस्तों के लिए पत्नी शीर खुरमा बनाती हंै। मेरे कुछ दोस्त रोजा भी रखते हैं।

सौहाद्र्र और खुशी का त्योहार

मिनिएचर आर्टिस्ट शाकिर अली ने बताया कि मेरा घर ईदगाह के पास है, ऐसे में ईदगाह की नमाज के बाद लोगों का घर आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। पत्नी की बनाई हुई सेवईंया, राजमा और लोबिया दोस्तों को खास पसंद है। हमारे पड़ोस में कई हिन्दू भाई रहते हैं और इस मुबारक मौके पर उनका गले मिलना, दिली सुकून देने जैसा होता है। मेरे शिष्य पिछले कई साल से ईद पर अपने परिवार सहित घर आते हैं। इनमें महेन्द्र, गिरधारी लाल सोनी जैसे लोग शामिल है। पिछले कई साल से शायर लोकेश कुमार साहिल भी ईद पर घर आ रहे हैं। यह सौहाद्र्र और खुशी का त्योहार है।

दोस्त के बिना अधूरी है ईद

अरशद हुसैन और शिवराज सिंह की दोस्ती अपने आप में गंगा-जमुनी तहजीब को बयां करने वाली है। अरशद ने बताया कि 1988 में शिवराज से एक क्लास के दौरान दोस्ती हुई थी। जिसके बाद हमारा साथ बना हुआ है, पिछले कई साल से मैं दिवाली कार्निवाल आयोजित करता हूं, यानी उनकी दिवाली का बराबर का हिस्सा रहा हूं और हमारी ईद शिवराज के बिना अधूरी रहती है। चांद रात के दिन हम साथ में डिनर करते हैं। हमारी दोस्ती ऐसी है कि शिवराज का कपड़े का बिजनेस है, लेकिन मुझे इवेंट करता देख उन्होंने खुद की भी इवेंट कंपनी शुरू कर ली। हमारे पॉलिटिकल मतभेद जरूर होते हैं, लेकिन मनभेद कभी नहीं रहे।