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राजस्थान के 37 IAS-IPS अफसर को बड़ी ज़िम्मेदारी, चुनावी राज्यों में रोकेंगे धनबल-बाहुबल-हिंसा

लोकतंत्र के इस महापर्व को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी 'स्पेशल फोर्स' यानी केंद्रीय पर्यवेक्षकों को मैदान में उतार दिया है। इस बार राजस्थान के प्रशासनिक और पुलिस बेड़े का दबदबा इन चुनावों में साफ नजर आने वाला है।

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भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में होने वाले उपचुनावों के लिए अपनी तैयारियां अंतिम चरण में पहुँचा दी हैं। इस महा-आयोजन को सफल बनाने के लिए देशभर से 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक (Observers) तैनात किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में राजस्थान की बड़ी भूमिका सामने आई है, जहाँ से 37 वरिष्ठ अधिकारियों को 'इलेक्शन वॉचडॉग' के रूप में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजस्थान से 28 IAS और 9 IPS का चयन

राजस्थान कैडर के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की कार्यकुशलता पर भरोसा जताते हुए निर्वाचन आयोग ने प्रदेश से कुल 37 अधिकारियों का चयन किया है।

  • IAS अधिकारियों का दल: राजस्थान से 28 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी 'सामान्य पर्यवेक्षक' (General Observers) के रूप में तैनात किए गए हैं। ये चुनाव प्रक्रिया के कुशल प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
  • IPS अधिकारियों की टीम: 9 भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी 'पुलिस पर्यवेक्षक' (Police Observers) के रूप में तैनात किए गए हैं, जिनका मुख्य काम संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना और हिंसा मुक्त चुनाव संपन्न कराना है।

राजस्थान के अफसरों पर क्यों है भरोसा?

राजस्थान कैडर के अधिकारियों का पिछला रिकॉर्ड निष्पक्ष चुनाव कराने में बेहतरीन रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और राजनीतिक चुनौतियों के बीच भी शांतिपूर्ण मतदान कराने का उनका अनुभव अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में काम आएगा। व्यय पर्यवेक्षक (Expenditure Observers) भी तैनात किए गए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनावों में धनबल का अनुचित प्रयोग न हो।

जनता और उम्मीदवारों से सीधे संवाद का निर्देश

निर्वाचन आयोग ने पर्यवेक्षकों के लिए 'वर्किंग प्रोटोकॉल' जारी किया है:

संपर्क विवरण: पर्यवेक्षक अपने क्षेत्र में पहुँचते ही अपना मोबाइल नंबर और संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे।

मिलने का समय: वे प्रतिदिन एक निश्चित समय निर्धारित करेंगे जिसमें कोई भी उम्मीदवार, राजनीतिक दल का प्रतिनिधि या आम नागरिक उनसे मिलकर चुनाव संबंधी शिकायत दर्ज करा सकेगा।

अनुच्छेद 324 का प्रयोग: इन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत की गई है, जो इन्हें विशेष शक्तियां प्रदान करता है।

संकल्प: "हिंसा और प्रलोभन मुक्त चुनाव"

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के दौरान स्पष्ट किया था कि आयोग का लक्ष्य प्रत्येक मतदाता को बिना किसी भय या पक्षपात के वोट डालने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पर्यवेक्षक जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया के प्रबंधन में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। आयोग ने इन सभी पर्यवेक्षकों को 18 मार्च 2026 तक अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुँचने के सख्त निर्देश दिए हैं।

चुनावी मैदान: कहाँ कितनी तैनाती?

आयोग ने राज्यों की संवेदनशीलता और विधानसभा सीटों के आधार पर पर्यवेक्षकों का बंटवारा किया है:

राज्य/केंद्र शासित प्रदेशविधानसभा सीटेंसामान्य पर्यवेक्षकपुलिस पर्यवेक्षकव्यय पर्यवेक्षक
पश्चिम बंगाल29429484100
तमिलनाडु23413640151
असम126513550
केरल140511740
पुडुचेरी3017417
उप-चुनाव8888