
High court bench will determine interim fees
जयपुर।
करीबन दो सौ किलोमीटर की दूरी एक भाई ने दो लाइन का ईमेल राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण को लिखा। जिसमें कहा कि उसकी नाबालिग बहन की शादी जबरन करवाई जा रही है। जिसके बाद सक्रिय हुए प्राधिकरण ने जिला कलेक्टर करौली और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से परिजनों को समझाया और शादी नहीं करने के लिए पाबंद किया।
आज अक्षय तृतीया है इस अबूझ सावे में बड़े स्तर पर बाल विवाह होते हैं। सामूहिक विवाह समारोह में तरह के बाल विवाह होने की बात सामने आती है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस बार सामूहिक विवाह तो नहीं हो रहे लेकिन गुपचुप बाल विवाह की कोशिश जरूर हो रही है। ऐसे ही बाल विवाह की शिकायत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंची। रालसा सचिव एके जैन ने बताया, करौली जिले की हिंडौन तहसील में दो लड़कियों का विवाह होने जा रहा था। लड़की के भाई की ओर से रालसा को मेल मिला। वहां पर कक्षा दस की साढे सोलह साल की छात्रा का विवाह करवाया जा रहा था। जिसके बाद करौली कलेक्टर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए परिजनों की समझाइस की। परिजनों ने विवाह नहीं करने का वायदा किया है। बालिका अब नियमित पढ़ाई करेगी। रालसा सचिव जैन के अनुसार अब तक बाल विवाह की अलग अलग जिलों से पांच शिकायतें आई। जिनको जिला कलेक्टर और जिला प्राधिकरण के जरिए रूकवाया गया है। इसी के साथ लॉकडाउन खुलने के बाद इस संबंध में पूरे प्रदेश में जनजागृति अभियान भी चलाया जाएगा।
राजस्थान के हालात सबसे खराब
एनसीपीसीआर और यंग लाइव्ज की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2011 की जनगणना में बीते दशक के भीतर कुल 1.2 करोड़ बाल विवाह हुए। जिनमें 69.5 लाख लड़के थे जिनकी 21 साल से कम उम्र में शादी हो गई और 51.6 लाख लड़कियां थीं जिनकी उम्र शादी के वक्त 18 साल से कम है। राजस्थान की हालात सबसे खराब रही है यहां पर 4.69 फीसदी लड़कों की शादी 21 साल से कम उम्र में हुई। इसी तरह 2.5 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो गई।
Published on:
26 Apr 2020 06:00 am
