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यह कैसा इमरजेंसी वार्ड, जहां चिकित्सक ही नहीं

बस्सी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रात में आने वाले मरीजों की जान को खतरा

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यह कैसा इमरजेंसी वार्ड, जहां चिकित्सक ही नहीं

जयपुर

बस्सी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन कक्ष में डॉक्टर ही नियुक्त नहीं है जिसके कारण मरीजों की जान सांसत में रहती है। आपातकालीन कक्ष में डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों के साथ परिजनों को भी एसएमएस अस्पताल के लिए चालीस किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। अस्पताल में रात के समय ऑन कॉल डॉक्टर बुलाना पड़ता है और डॉक्टर मरीज को देखकर तुरंत जयपुर की राह दिखा देता है। गौरतलब है कि सरकार लोगों को स्वास्थ्य की सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों में देने के लिए बड़े-बड़े वादे कर रही है वहीं बस्सी क्षेत्र के सबसे बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन सेवाएं ही उपलब्ध नहीं हैं जबकि अस्पताल में आपातकालीन कक्ष बना हुआ है। लेकिन यह कक्ष बिना डॉक्टर के सूना पड़ा रहता है। कस्बे की करीब चालीस हजार की आबादी व विधानसभा क्षेत्र की चार लाख से ज्यादा आबादी होने के बावजूद क्षेत्र में तीन सीएचसी, छह पीएचसी व अन्य कई सबसेंटर मौजूद है उसके बावजूद क्षेत्र में किसी भी जगह आपातकालीन सेवाएं नहीं हैं और क्षेत्र से सभी मरीजों को बस्सी सीएचसी रैफर कर दिया जाता है। क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई स्टेट हाइवे होने के बावजूद आए दिन दुर्घटनाओं के साथ कई घटनाएं हो जाती हैं जिसे बस्सी के सीएचसी लाया जाता है। जहां उन्हें इमरजेंसी में कोई भी डॉक्टर नहीं मिलता है।

मंत्री को भी कराया था अवगत

बस्सी क्षेत्र में औचक निरीक्षण को आए स्वास्थ्य व चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ को इमरजेंसी चौबीस घंटे शुरू करने के लिए अवगत कराया था जिसके लिए उन्हें डॉक्टरों की व्यवस्था के लिए भी कहा गया था। लेकिन कई माह बीत जाने के बाद अब तक इमरजेंसी में कोई भी डॉक्टर नहीं लगाया गया जिसकी वजह से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को दो चार होना पड़ता है।

सबसे ज्यादा रहता है आउटडोर

बस्सी सीएचसी के आउटडोर में प्रतिदिन एक हजार से पंद्रह सौ मरीज आते हैं वहीं जननी सुरक्षा के तहत करीब दो सौ प्रसूताएं जांच के लिए इस अस्पताल में आती हैं। क्षेत्र से रैफर किए मरीज भी इसी अस्पताल में आते हैं लेकिन रात के समय इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं होने के कारण इन्हें दो चार होना पड़ता है।

यदि डॉक्टरों व कम्पाउडरों की संख्या बढ़ा दी जाए तो यहां इमरजेंसी में डॉक्टर की सेवाएं चौबीस घंटे मिल सकती हैं। इसके लिए कई बार लिखित में प्रस्ताव बनाकर भिजवाया जा चुका है। - डॉ. दिनेश मित्तल, प्रभारी, सीएचसी

बस्सी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इमरजेंसी डॉक्टर लगाने की कवायद की जा रही है। शीघ्र ही रात में इमरजेंसी में डॉक्टर लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. प्रवीण असवाल, सीएमएचओ, जयपुर