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Rajasthan: 11 साल के बेटे ने पिता को दी मुखाग्नि तो कांपने लगे हाथ, अनाथ हुए 2 मासूमों पर टूटा दुखों का पहाड़, रुला देगी ये दर्दनाक कहानी

Emotional Story Of 2 Child: सबसे भावुक क्षण तब आया जब मृतक के 11 वर्षीय पुत्र नवीन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे की कांपती उंगलियों और नम आंखों ने हर किसी को भावुक कर दिया।

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फोटो: पत्रिका

Brother-Sister Become Orphan: फागी उपखंड क्षेत्र के ग्राम चकवाड़ा में एक मजदूर की असमय मृत्यु ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। बुधवार को खेत पर मजदूरी करते समय अचानक हृदयाघात से 45 वर्षीय कानाराम बैरवा की मौत हो गई। यह घटना जितनी अचानक थी, उतनी ही मार्मिक भी। सबसे भावुक क्षण तब आया जब मृतक के 11 वर्षीय पुत्र नवीन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे की कांपती उंगलियों और नम आंखों ने हर किसी को भावुक कर दिया।

कानाराम की पत्नी लाली देवी का निधन वर्ष 2017 में बीमारी के चलते हो गया था। तब से वह अकेले ही अपने पुत्र नवीन और 14 वर्षीय पुत्री लक्ष्मी का पालन-पोषण कर रहा था। मजदूरी कर किसी तरह बच्चों की पढ़ाई और जीवन की गाड़ी खींच रहा था। लेकिन अब उसकी मृत्यु के बाद दोनों बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता बद्री मीणा ने बताया कि कानाराम एक मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था। उसने कभी किसी से मदद नहीं मांगी, बल्कि अपनी मेहनत से बच्चों को आगे बढ़ाने का सपना देखा। अब उसकी असमय मृत्यु ने गांव में चिंता की लहर पैदा कर दी है। हर किसी की जुबां पर एक ही सवाल है…इन बच्चों का भविष्य अब कौन संवारेगा?

मृतक के दो बड़े भाई हैं, जो स्वयं मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में नवीन और लक्ष्मी की शिक्षा, भोजन और जीवनयापन की जिम्मेदारी उठाना उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण है। गांव के लोग इस परिवार की स्थिति को देखकर चिंतित हैं और प्रशासन से बच्चों के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

सरकारी सहायता मिले, उपमुख्यमंत्री से लगाएंगे गुहार

गांववासियों का कहना है कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित सहायता प्रदान करनी चाहिए। बच्चों को न केवल आर्थिक मदद की जरूरत है, बल्कि मानसिक और सामाजिक सहयोग भी आवश्यक है ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें और जीवन में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा से गुहार लगाएंगे। कानाराम की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और सभी ने नम आंखों से उसे विदाई दी।