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Engineer’s Day 2022 : इंजीनियरिंग प्रोफेशन को लेकर गर्व भी, लेकिन भविष्य की चिंता बरकरार…

गगनचुंबी इमारतें हो या फिर नेशनल हाईवे, ट्रेक पर तेजी से दौड़ती ट्रेन हो या आसमान को भेदते फाइटर प्लेन, हर जगह इंजीनियरिंग हैं। इंजीनियरिंग हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर हर जगह अपना अहम रोल निभाती है।

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अरविंद पालावत/जयपुर। गगनचुंबी इमारतें हो या फिर नेशनल हाईवे, ट्रेक पर तेजी से दौड़ती ट्रेन हो या आसमान को भेदते फाइटर प्लेन, हर जगह इंजीनियरिंग हैं। इंजीनियरिंग हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर हर जगह अपना अहम रोल निभाती है। भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है और ये दिन हर इंजीनियर के जीवन में खास माना जाता है। विश्वेश्वरैया शिक्षा की महत्ता को भलीभांति समझते थे। लोगों की गरीबी व कठिनाइयों का मुख्य कारण वह अशिक्षा को मानते थे। वह किसी भी कार्य को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने में विश्वास करते थे। आखिर इंजीनियर्स के जीवन में इस दिन के क्या मायने हैं और इंजीनियरिंग में नित नए क्या-क्या परिवर्तन हो रहे है और किस तरह के चैलेंज सामने हैं, इन सभी मुद्दों को जानिए क्या कहना है नामचीन इंजीनियर्स काः

लोगों के जीवन को आसान बनाती है इंजीनियरिंगः डॉ. गौड़

एमएनआईटी में सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरूण गौड़ ने कहा कि इंजीनियरिंग लोगों के जीवन को आसान बनाती है। साथ ही कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई अपने आप में बहुत स्पेशल है। हर चार-पांच साल में इंजीनियरिंग में अमूलचूल परिवर्तन होते हैं और वो पढ़ाई का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग हर क्षेत्र में हैं। चाहे वह पर्यावरण हो या फिर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर। मेडिकल में भी इंजीनियरिंग का बड़ा महत्व है। डॉ. गौड़ बताते हैं कि इंजीनियरिंग की स्टडी में जरूरत के हिसाब से कई बड़े परिवर्तन किए गए हैं।

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एक दौर था जब 20 एमबी की हार्डडिस्क बहुत बड़ी मानी जाती थीः दिनेश सिंह

महाराष्ट्र के कोल्हापुर की प्रसिद्ध डीवाई पाटिल इंजीनियरिंग कॉलेज से 1992 में पास आउट कम्प्यूटर साइंस के इंजीनियर दिनेश सिंह का कहना है कि उस दौर में उनकी ब्रांच का काफी क्रेज था। हालात यह थे कि उस समय कम्प्यूटर एक्सटी बेस 8088 प्रोसेसर पर बेस्ड होते थे। हार्डडिस्क की कैपेसिटी 10 एमबी होती थी। हार्डडिस्क नहीं होने पर फ्लॉपी को ही बूटेबल किया जाता था। उस दौर में 20 एमबी की हार्डडिस्क तो बहुत बड़ी मानी जाती थी और उसका वजन कम से कम तीन किलो होता था। ये सभी सिस्टम डॉस बेस्ड कम्प्यूटर होते थे। आज इंजीनियरिंग की ही देन है कि इंटेल आई 7 प्रोसेसर आ चुका है। हार्डडिस्क ट्रेटा बाइट यानी टीबी में आने लगी है और वजन 100 ग्राम से भी कम होता है। इसलिए इंजीनियरिंग का महत्व हमेशा बढ़ेगा।

अच्छे पैकेज नहीं मिलना प्रोफेशन के सामने चुनौतीः देवराज सोलंकी

जलदाय विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर और एमएनआईटी एल्यूमिनाई एसोसिएशन के प्रेसिडेंट देवराज सोलंकी ने इंजीनियर्स को बधाई देते हुए प्रोफेशन को लेकर चिंता भी जताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो इंजीनियर्स पढ़ाई कर निकल रहे हैं, उन्हें अच्छी जॉब नहीं मिल रही है। अच्छा पैकेज नहीं मिलने के कारण हालात ये हो चुके हैं कि इंजीनियर्स अपना फील्ड चेंज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होना बेहद जरूरी है। एमएनआईटी से 1990 में पास आउट हुए सोलंकी का कहना है कि उनके समय की इंजीनियरिंग की पढ़ाई और वर्तमान दौर की इंजीनियरिंग में बहुत ज्यादा परिवर्तन हो चुके हैं।