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स्मार्ट डस्टबिन बताएगा अपना हाल, कचरा कितना भर गया मैसेज भेजकर करेगा अलर्ट

Smart Dustbin।। अक्सर हमने देखा है कि सड़क के किनारे लगे डस्टबिन कचड़ा से भर जाने के बाद भी सफाईकर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। जिससे चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दरअसल, अब डस्टबिन खुद बताएगा कि वह भर गया है। जी हां यह सुनने में अजीब जरूर लग रहा होगा, लेकिन यह सच है सोनभद्र के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने मिलकर स्मार्ट डस्टबिन का निर्माण किया है।

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स्मार्ट डस्टबिन बताएगा अपना हाल, कचरा कितना भर गया मैसेज भेजकर करेगा अलर्ट

स्मार्ट डस्टबिन बताएगा अपना हाल, कचरा कितना भर गया मैसेज भेजकर करेगा अलर्ट

अक्सर हमने देखा है कि सड़क के किनारे लगे डस्टबिन कचड़ा से भर जाने के बाद भी सफाईकर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। जिससे चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। दरअसल, अब डस्टबिन खुद बताएगा कि वह भर गया है। जी हां यह सुनने में अजीब जरूर लग रहा होगा, लेकिन यह सच है सोनभद्र के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने मिलकर स्मार्ट डस्टबिन का निर्माण किया है। बता दें कि इस डस्टबिन को बनाने में 1 हजार रुपये से भी कम की लागत लगी है। 3 छात्रों ने मिलकर एक ऐसे स्मार्ट डस्टबिन का निर्माण किया है, जो बताएगा कि इसमें कचरा कितना भर गया है। इस स्मार्ट डस्टबिन का निर्माण बीटेक इलेक्ट्रिकल के सेकेंड इयर के छात्र अभय प्रताप, मानसी सिंह और सर्वेश द्विवेदी ने किया है।

-डस्टबिन की खासियत

डस्टबिन निर्माण में 1 हजार रुपए से भी कम खर्च
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उपयोग
जीपीआरएस सिस्टम से लैस है डस्टबिन
डस्टबिन में लगा है अल्ट्रासोनिक सेंसर
डस्टबिन में लगा है माइक्रोकंट्रोलर्स
50 फीसदी कूड़ा भरने पर सफाईकर्मी को जाएगा मैसेज
75 फीसदी कूड़ा भरने पर सुपरवाइजर को मैसेज
95 फीसदी कूड़ा भरने पर संबंधित अधिकारी को मैसेज

नोएडा स्थित उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग में एक कार्यक्रम में देश भर से 24 प्रोजेक्ट को शामिल किया गया था। जिनमें इस डिजाइन को भी शामिल किया गया। जहां इस डिजाइन को पहला स्थान प्राप्त हुआ। कॉलेज के डायरेक्टर वीके गिरी ने बताया कि इस स्मार्ट डस्टबिन की कनेक्टिविटी मोबाइल के साथ है। जिससे लोगों में सफाई की व्यवस्था दुरुस्त होगी और स्वच्छता पर अधिक ध्यान रखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अभी इसमें यह भी प्रयास किया जा रहा है कि ट्रैवल को देखते हुए कौन सा डस्टबिन नजदीक है। इसकी जानकारी में भी सुधार की जरूरत है। जिसके बाद शासन स्तर पर इसकी बात कर डस्टबिन को नगरपालिका या महानगरपालिका में इस्तेमाल किया जा सकेगा।