
Jaipur News : सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा कि सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित पांडुपोल मंदिर तक अगले साल तक निजी वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी और उनके स्थान पर पांडुपोल हनुमान मंदिर तक इलेक्ट्रिक शटल बसें शुरू की जाएंगी। इससे बाघों का संरक्षण होगा, वहीं तीर्थयात्रियों को सहुलियत होगी। राज्य सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि बफर जोन में अवैध रूप से चल रहे होटल-रिसॉर्टस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा फील्ड अधिकारियों और स्टाफ की कमी को दूर किया जाएगा। अब सुनवाई 20 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट में वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण से जुड़े मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। इसमें राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने टाइगर आवास व्यवस्था, सरिस्का क्षेत्र में फील्ड स्टाफ बढ़ोतरी सहित सीईसी की सरिस्का विकास से जुड़ी अन्य सिफारिशों पर भी सहमति जताई। शर्मा ने कहा कि इस मामले में कोर्ट की भावना से मुख्य सचिव को अवगत करवा दिया जाएगा।
31 मार्च 2025 से पांडुपोल मंदिर के सभी गेटों से निजी वाहनों की एंट्री रोक दी जाए और इलेक्ट्रोनिक शटल बसें चलाई जाएं।
21 इलेक्ट्रिक बसों के प्रस्ताव को शीघ्र लागू किया जाए, जो सरिस्का व टहला गेट तक संचालित हों।
मार्च 2025 के बाद वार्षिक मेले के समय रोडवेज भी यहां के लिए इलेक्ट्रिक बसें चलाए।
अन्य परिवहन विकल्पों का भी अध्ययन किया जाए।
क्षेत्र में सड़कों की हालत सुधारी जाए।
शटल बसों की पार्किंग मंदिर के पास हो।
सिलिबेरी गेट को चार पहिया, दो पहिया वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए बंद रखा जाए।
ध्वनि प्रसारण यंत्रों पर तत्काल रोक लगा दी जाए।
बफर क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ 30 सितंबर तक कार्रवाई शुरू की जाए।
30 सितम्बर तक क्षेत्र को क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के समान बनाया जाए।
एसटीआर के ईएसजेड को 31 दिसम्बर तक नोटिफाई कर दिया जाए।
मंदिर में भोजन नहीं बने, केवल बाहर से लाए भोग या प्रसाद की ही मंजूरी दी जाए।
मंदिर ट्रस्ट कचरे का भी उचित प्रबंधन करे।
Published on:
08 Aug 2024 11:14 am
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