
रणजी ट्रॉफी 2025-26 का सीजन जम्मू-कश्मीर के लिए 'फेयरीटेल' साबित हो रहा है। बुधवार को कल्याणी में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में जेएंडके ने दो बार की चैंपियन बंगाल को 6 विकेट से हराकर पहली बार फाइनल में जगह बनाई। जीत के बाद जहाँ पूरी घाटी में जश्न का माहौल है, वहीं राजस्थान के क्रिकेट प्रेमी भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। कारण हैं टीम के बॉलिंग कोच पी. कृष्ण कुमार, जिन्होंने अपनी घातक गेंदबाजी रणनीतियों से जेएंडके के पेस अटैक को टूर्नामेंट का सबसे खतरनाक आक्रमण बना दिया है।
पी. कृष्ण कुमार उर्फ़ मोनू का राजस्थान क्रिकेट से रिश्ता दशकों पुराना और बेहद गहरा है। वे केवल राजस्थान के पूर्व कप्तान ही नहीं, बल्कि यहाँ के क्रिकेट की रग-रग से वाकिफ हैं।
पी. कृष्ण कुमार ने राजस्थान के लिए 100 से भी अधिक रणजी ट्रॉफी मैच खेले हैं। इसके अलावा उन्होंने दलीप ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी जैसी तमाम प्रतिष्ठित ट्रॉफियां खेली हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका दौरे पर आई सीनियर टीम के खिलाफ बोर्ड अध्यक्ष एकादश का प्रतिनिधित्व किया है। वह पाकिस्तान, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड क्रिकेट टीमों के खिलाफ खेल चुके हैं।
वहीं वर्ष 2005 में अपना क्रिकेट करियर खत्म करने के बाद उन्होंने 2006 में एनसीए, बीसीसीआई से 'लेवल बी' किया। करीब दो दशक से वे देश के विभिन्न राज्य टीमों के विभिन्न आयु समूहों को कोचिंग दे रहे हैं। वे तेज गेंदबाजों को कोचिंग देने में माहिर हैं।
इन्होने चर्चित गेंदबाज़ रहे दीपक चाहर, खलील अहमद, अवेश खान, ऋतुराज सिंह, अनिकेत चौधरी और तनवीर उल हक (भारत "ए"), सुमित जुयाल (भारत अंडर -19), अवनीश सुधा (भारत अंडर -19) जैसे गेंदबाजों पर काम किया और उन्हें गेंदबाज़ी गुर सिखाए। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने 100 से अधिक लड़कों को तैयार किया है, जिन्होंने विभिन्न आयु समूहों में अपने राज्यों के लिए खेला है, यानी अंडर-19 से लेकर भारत की सीनियर टीम तक।
बंगाल के खिलाफ सेमीफाइनल में जेएंडके के गेंदबाजों ने जो जलवा दिखाया, उसमें कोच कृष्ण कुमार की छाप साफ नजर आई।
राजस्थान का कनेक्शन सिर्फ कृष्ण कुमार तक सीमित नहीं है। टीम के फील्डिंग कोच दिशांत याग्निक भी राजस्थान से ही ताल्लुक रखते हैं और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स से जुड़े रहे हैं। इन दो राजस्थानी दिग्गजों की जुगलबंदी ने जम्मू-कश्मीर की टीम की फिटनेस और अनुशासन को एक अलग स्तर पर पहुँचा दिया है।
जम्मू-कश्मीर की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि राजस्थान के क्रिकेट कोचों की मांग और विशेषज्ञता राष्ट्रीय स्तर पर कितनी अधिक है। 16 मार्च 2026 को होने वाले फाइनल में जेएंडके का मुकाबला कर्नाटक या उत्तराखंड से होगा।
Updated on:
18 Feb 2026 03:26 pm
Published on:
18 Feb 2026 03:25 pm
