
फैक्ट चैक : नासा में 58 फीसदी भारतीय कर्मचारी की पोस्ट वायरल
सोशल मीडिया पर किसी फोटो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल किया जाता रहता है। वहीं किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर भी उसे शेयर किया जाता है। कई बार सच्चाई कोसों दूर होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना सच जाने उसे वायरल करते रहते हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर वायरल हो रही है। इस पोस्ट में कई दावे किए गए हैं। इनमें नासा में 58 फीसदी कर्मचारी भारतीय हैं, गूगल, नोकिया, एडोब, मास्टरकार्ड, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय हैं और अमेजन के बीओडी भारतीय हैं, जैसे दावे शामिल हैं। राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस वायरल मैसेज के पीछे का सच जाना तो इसमें कुछ दावे सच और कुछ फर्जी निकले। सभी दावों के हिसाब से देखें तो यह पोस्ट भ्रामक पाई गई है।
यह है वायरल पोस्ट में
सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट में लिखा है कि गूगल के सीईओ भारतीय हैं, नोकिया के सीईओ भारतीय हैं, एडोब के सीईओ भारतीय हैं, अमेजन के बीओडी भारतीय हैं, मास्टरकार्ड के सीईओ भारतीय हैं, पेप्सिको की सीईओ इंदिरा नूई भारतीय हैं, नासा के 58 फीसदी कर्मचारी भारतीय हैं। भारतीय भाइयों और बहनों को सलाम।' फैजल सैफी नाम के यूजर ने इस पोस्ट को 1 जनवरी 2020 को फेसबुक पर शेयर किया है।
जांच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने पहले नासा में 58 फीसदी भारतीय कर्मचारी होने के दावे की जांच की। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की डेटा एंड एनालिटिक्स यूनिट के मुताबिक जाति और नस्ल के हिसाब से देखें तो नासा के वर्कफोर्स में 8 फीसदी एशियाई अमेरिकन या पैसिफिक आइलैंडर हैं। इनमें 1.1 फीसदी अमेरिकन इंडियन हैं। नासा की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 'नासा विभिन्न पृष्ठभूमि वाले करीब 17 हजार लोगों को रोजगार देता है। 72 फीसदी नासा के कर्मचारी श्वेत या कोकेशियान हैं, 12 फीसदी ब्लैक या अफ्रीकी अमेरिकी, 7 फीसदी एशियाई अमेरिकन या पैसिफिक आइलैंडर, 8 प्रतिशत हिस्पैनिक या लातिनी; 1 प्रतिशत अमेरिकी भारतीय या अलास्का मूल निवासी और एक फीसदी 1 प्रतिशत से कम में एक से अधिक नस्ल हैं। नासा मॉडल इक्वल इम्प्लॉइमेंट अपॉच्र्युनिटी एजेंसी प्लान के मुताबिक एशियाई अमेरिकन या पैसिफिक आइलैंडर के लोगों की हिस्सेदारी 1996 के 4.5 फीसदी की तुलना में 2016 में 7.4 फीसदी तक पहुंच गई। हालांकि यह संख्या वायरल पोस्ट में दिए गए 58 फीसदी के आंकड़े के आसपास भी नहीं है। इसका मतलब यह है कि नासा में भारतीय कर्मचारियों की कुल संख्या एशियाई अमेरिकन या पैसिफिक आइलैंडर कैटेगरी में दी गई संख्या के कम ही होगी।
दूसरा दावा
वहीं वायरल पोस्ट में दूसरा दावा कि गूगल के सीईओ भारतीय हैं। हां तो यह सही है कि गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई हैं। सुंदर पिचाई भारत में पैदा हुए हैं। उनकी राष्ट्रीयता अमेरिकी, भारत में पैदा हुए अमेरिकी की है।
वहीं अगला दावा कि नोकिया के सीईओ भारतीय हैं। नोकिया के सीईओ राजीव सूरी हैं। वह भारत में पैदा हुए सिंगापुर के नागरिक हैं।
अगले दावे में एडोब के सीईओ को भारतीय बताया गया है। एडोब के सीईओ भारतीय मूल के शांतनु नारायण हैं। शांतनु अमेरिकी नागरिक हैं।
अगले दावे में अमेजन के बीओडी को भारतीय बताया गया है। यह स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। जहां तक अमेजन के ऑफिसर्स एंड डायरेक्टर्स की बात है तो इसमें जेफ पी बेजॉस प्रेसिडेंट, सीईओ और बोर्ड के चेयरमैन हैं। अमेजन में बीओडी नाम की कोई पोजिशन नहीं मिली। इसी तरह अगले दावे में मास्टरकार्ड के सीईओ को भारतीय बताया गया है। जांच में पता चला कि अजय बंगा मास्टरकार्ड के प्रेसिडेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) हैं। साथ ही वह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य भी हैं। एक वेबसाइट के मुताबिक भारत में पैदा हुए अजय बंगा को 2007 में अमेरिका की नागरिकता मिली। अब अगले दावे के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ भारतीय सत्या नडेला हैं। वे मूल रूप से हैदाराबाद से ताल्लुक रखने वाले बेलेव्यू वॉशिंगटन में रहते हैं। अब आखिरी दावा कि पेप्सी की सीईओ इंदिरा नूई भी भारतीय हैं। जांच में सामने आया कि इंदिरा नूई भारतीय अमेरिकी बिजनेस एग्जीक्यूटिव और पेप्सिको की पूर्व सीईओ हैं।
सच
राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने इस वायरल मैसेज के पीछे का सच जाना तो वायरल पोस्ट का यह दावा सही नहीं है कि नासा के 58 फीसदी कर्मचारी भारतीय हैं। इसमें जिन सीईओ के नाम का जिक्र है, उनमें से अधिकतर भारतीय मूल के हैं, लेकिन उनके पास नागरिकता किसी और देश की है। कुल मिलाकर इस वायरल पोस्ट के कई दावे गलत हैं।
Published on:
03 Feb 2020 11:41 pm
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