18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Farmer protest : शिक्षकों ने कहा, जारी रहेगा किसानों को समर्थन

किसानों पर कार्रवाई का विरोधराजस्थान विवि के शिक्षकों ने किया विरोध

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

Jan 29, 2021

Farmer protest : शिक्षकों ने कहा, जारी रहेगा किसानों को समर्थन

Farmer protest : शिक्षकों ने कहा, जारी रहेगा किसानों को समर्थन

राजस्थान विश्वविद्यालय (Rajasthan University) के शिक्षकों ने शुक्रवार को किसान आंदोलन (farmer protest) पर साजिशपूर्ण दमनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए विरोध दर्शाया। विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर सीबी यादव ने कहा कि २६ जनवरी को लाखों ट्रैक्टरों के साथ किसानों की शांतिपूर्ण परेड को सरकार समर्थित तत्वों बदनाम करके कमजोर करने की नियत से लाल किले पर धार्मिक झंडा फहरा कर शर्मसार करना हो अथवा गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन पर दमनात्मक कार्रवाई हो, यह सब लोकतंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक है। राजस्थान विश्वविद्यालय का शिक्षक पुरजोर तरीके से इसका विरोध करता है। सरकार ही जब नागरिकों के साथ साजिश करने लग जाए तो यह देश के भविष्य के लिए बहुत ही निराशाजनक बात है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिक्षक डॉ. मनीष सिनसिनवार ने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय का शिक्षक सदैव राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर रहा है एवं किसान आंदोलन के प्रति विश्वविद्यालय के शिक्षकों का प्रारंभ से ही समर्थन रहा है। पूर्व सिंडिकेट सदस्य डॉ. ओम महला ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने किसान आंदोलन के दमन के लिए लाल किले की अस्मिता से भी समझौता करके भारतीयों को शर्मसार किया है ।जिस प्रकार से इस कृत्य में सरकार समर्थित तत्वों के नाम सामने आ रहे हैं वह सरकार की नियत को बिल्कुल स्पष्ट कर रहा है। सभी शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि पहले भी राजस्थान विश्वविद्यालय के शिक्षक समुदाय ने दिल्ली किसान आंदोलन को नैतिक समर्थन के साथ.साथ रसद सामग्री भी पहुंचाई थी आगे भी यहां का शिक्षक समुदाय इस प्रक्रिया को अनवरत जारी रखेगा। प्रदर्शन में डॉ. लादुराम चौधरी अनुभव वासनिक, डॉ. गणेश गुर्जर, डॉ. डी सुधीर, डॉ. मुकेश वर्मा, डॉ. नरेंद्र जाखड़, डॉ. कैलाश समोता,डॉ. निमाली सिंह, डॉक्टर सरिता चौधरी, डॉ.गजेंद्र फोगाट, आदि शामिल हुए। शिक्षकों के साथ साथ विश्वविद्यालय के कर्मचारी वर्ग एवं छात्रों की भी भागीदारी रही।