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Kisan Andolan : अब गवर्नर हाउस का घेराव कर आक्रोश जताएंगे किसान, जानें क्या बनी नई रणनीति

केंद्रीय कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन जारी, संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन तेज़ करने की बनाई रूपरेखा, 26 जून को गवर्नर हाउस का घेराव कर जताया जाएगा विरोध, शाहजहांपुर-खेडा बॉर्डर के ‘पड़ाव’ को भी किया जाएगा मजबूत,

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Farmers Protest against Modi Government Farm Law, Latest Updates

जयपुर।

केंद्रीय कृषि कानून के विरोध में जारी किसान आन्दोलन को और तेज़ किए जाने की रणनीति बनाई गई है। इसके तहत आगामी 26 जून को सभी राज्यों के गवर्नर हाउस के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया जाना तय हुआ है। यही नहीं केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों को एक बार फिर जागरूक करके एकजुट किये जाने की तैयारी भी की जा रही है।

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान नेता हिम्मत सिंह गुर्जर ने बताया कि 26 जून के दिन ही केंद्र सरकार ने आनन्-फानन में किसान विरोधी कृषि बिलों को पास करवाया था। यही वजह है कि केंद्र सरकार के खिलाफ एक बार फिर ‘हल्ला बोलने’ के लिए इस दिन को चुना गया है।

गुर्जर ने बताया कि 26 जून के दिन को ही ‘लोकतंत्र और खेती बचाओ दिवस’ के तौर पर भी मनाया जाएगा। इस दौरान राजस्थान में भी राजभवन के बाहर किसान एकजुट होकर विरोध प्रदर्शित करेंगे। फिलहाल इसे सफल बनाने की तैयारियां की जा रही हैं।

गाँवों में भाजपा नेताओं का होगा विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा ने इस दिन केंद्र सरकार और भाजपा पार्टी का पूरे देश में विरोध करने का फैसला लिया है। इसके तहत भाजपा नेताओं को गाँवों में घुसने नहीं दिया जाएगा और शहरों में कोई भी प्रशासनिक या राजनीतिक कार्यक्रम इस दिन नहीं होने दिए जायेंगे।

‘बॉर्डर’ पर किसानों को फिर किया जाएगा एकजुट
किसान नेता हिम्मत सिंह ने राजस्थान में किसान आंदोलन को और तेज किये जाने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि शाहाँजापुर-खेड़ा बॉर्डर पर जारी किसान पड़ाव स्थल पर किसानों को फिर से एकजुट करने के लिए गांव-गांव जाकर अपील की जाएगी। उन्हें ज्यादा से ज्यादा संख्या में बॉर्डर पर पहुंचने को लेकर जागरूक किया जाएगा।

गुर्जर ने केंद्र सरकार पर देश में अघोषित आपातकालीन लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा केंद्र सरकार लोकतंत्र को समाप्त करने की साज़िश पर काम कर रही है। किसान आंदोलन के 7 महीने पूरे होने जा रहे हैं।


कबीर जयंती भी मनाएंगे किसान
संयुक्त किसान मोर्चा ने 24 जून को कबीर जयंती मनाने का भी फैसला लिया है। मोर्चे से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि कबीर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। कबीर ने विचारक और समाज-सुधारक के रूप में सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक किया और दलितों को समाज में उनका हक़ दिलाया। उनके ये कृत्य आज किसानों के लिए भी आदर्श बने हुए हैं।