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असमय बढ़ते तापमान से किसानों की बढ़ी चिंता, समय से पहले फसल पकने का खतरा

तापमान बढऩे से दाना छोटा रह सकता है। पछेती बुवाई वाली फसल को विशेष रूप से नुकसान हो सकता है जिससे किसानों को पुन: सिंचाई करनी पड़ सकती है।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Feb 16, 2025

कोटपूतली-बहरोड़. मौसम में अचानक आए बदलाव ने जिले में किसानों की चिंता और मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ते तापमान के कारण रबी फसलों के उत्पादन पर असर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। यदि तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो गेहूं और सरसों की पैदावार प्रभावित हो सकती है खास तौर से गेहूं की जिससे उत्पादन में 10 फीसदी तक कमी आ सकती है। क्वांटिटी और क्वालिटी में फर्क पड़ सकता है।

तापमान में बढ़ोतरी से गेहूं और सरसों पर असर
क्षेत्र में इन दिनों तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी जा रही है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे फसलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल में बाली आने लगी है और उसे ठंडे मौसम की अभी आवश्यकता है, लेकिन तापमान बढऩे से दाना छोटा रह सकता है।
जिले में 42,461 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है लेकिन तापमान में वृद्धि से दाने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है वहीं 97,016 हेक्टेयर में सरसों बोई गई है जो पकाव पर है परंतु पछेती बुवाई वाली फसल को विशेष रूप से नुकसान हो सकता है जिससे किसानों को पुन: सिंचाई करनी पड़ सकती है।

कीट और रोगों का खतरा बढ़ा
तापमान बढऩे से रसचूसक कीटों खासकर चेपा रोग का असर बढऩे की संभावना है। सरसों की फसल पर इसका विशेष प्रभाव पड़ सकता है जिससे उत्पादन में कमी आ सकती है। किसानों को कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव करने की जरूरत पड़ सकती है।

मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से मौसम में बदलाव हो सकता है। आंशिक बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिल सकती है। किसान भी प्रार्थना कर रहे हैं कि यदि एक बारिश हो जाए तो फसल के लिए संजीवनी साबित होगी।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रात का तापमान भी बढ़ा तो फसलों को अधिक नुकसान होगा। फसलें समय से पहले पक सकती हैं जिससे उत्पादन में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि जिनके पास सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं वे समय-समय पर सिंचाई करते रहें। फसल में चेपा रोग के लक्षण दिखने पर कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव करें व मौसम की जानकारी पर नजर बनाए रखें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर अमल करें।
यदि मौसम का यही रुख रहा तो गेहूं और सरसों की पैदावार प्रभावित होगी। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं, उम्मीद है कि बारिश उनकी मेहनत को बचा लेगी।

बारिश रहेगी फायदेमंद
सरसों की फसल में कोई खास असर नहीं पड़ेगा परंतु गेहूं में पड़ सकता है यदि रात का भी टेंपरेचर बढ़ेगा तो। सरसों की फसल तो ज्यादातर पकाव में आ गई है और अभी किसी तरह का चेपा रोग नजर नहीं आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार हल्की बारिश की संभावना है यदि बारिश होती है तो फसलों के लिए फायदेमंद रहेगी।

महेन्द्र जैन, संयुक्त निदेशक कृषि, कोटपूतली-बहरोड़