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श्मशान में हाहाकार, आखिरी लकड़ी देकर पिता की जलती चिता में कूद गई बेटी

पिता का इतना ख्याल रखती, इतनी सेवा करती कि लोग मिसाल देते थे... बेटी हो तो चन्द्रकला जैसी हो। उस चन्द्रकला ने मंगलवार को ऐसा कदम उठाया कि लोगों का कलेजा कांप उठा।

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father die due to corona daughter jumped into burning pyre in barmer

बाड़मेर। पिता का इतना ख्याल रखती, इतनी सेवा करती कि लोग मिसाल देते थे... बेटी हो तो चन्द्रकला जैसी हो। उस चन्द्रकला ने मंगलवार को ऐसा कदम उठाया कि लोगों का कलेजा कांप उठा। कोरोना से बुजुर्ग पिता की मौत का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाई। श्मशान में अन्तिम लकड़ी देते समय पिता की जलती चिता में कूद गई। इससे श्मशान में हा-हाकार मच गया। जैसे-तैसे निकालकर उसे अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन 70 प्रतिशत झुलसने के कारण उसकी हालत गम्भीर है।


दिल दहला देने वाला यह वाकया बाड़मेर की रॉय कॉलोनी में घटित हुआ। कॉलोनी के निवासी दामोदरदास शारदा की कोरोना के कारण मंगलवार को राजकीय अस्पताल में मृत्यु हो गई। पिता की मौत पर बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

अन्तिम संस्कार में हम भी जाएंगी
परिजन ने बेटियों को घर जाने कहा लेकिन वे अड़ गईं। बोलीं, पिता के अन्तिम संस्कार में हम भी जाएंगी। शव को एम्बुलेंस के जरिए श्मशान घाट पहुंचाया गया, जहां कोरोना गाइडलाइन के अनुसार अंतिम संस्कार हुआ।

अन्तिम लकड़ी देने गई और... कूद पड़ी
कपालक्रिया के बाद सभी परिजन जाने लगे तो सबसे छोटी बेटी 30 वर्षीय चन्द्रकला अन्तिम लकड़ी देने पहुंची और जलती चिता में कूद गई। अचानक हुई इस घटना से परिजन के होश उड़ गए। श्मशान में हा-हाकार मच गया। नगर परिषद के कार्मिक और परिजन दौड़े, चन्द्रकला को जैसे-तैसे निकालकर अस्पताल ले गए। चिकत्सकों ने बताया कि वह 70 प्रतिशत झुलस गई है, हालत गम्भीर है। सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची।

चार बेटियां, पिता पर छिड़कतीं प्राण
दामोदरदास के 4 पुत्रियां व एक पुत्र है। पुत्र लगभग 20 साल से बाहर रह रहा है। एक बेटी विवाहित है, शेष 3 बेटियां साथ रहती हैं। बताया गया कि 25 साल पहले बीमारी के कारण दामोदरदास का एक हाथ काट दिया गया था। तीनों बेटियां पिता का पूरा ख्याल रखती थीं। पिता को किसी काम से बाहर जाना होता तो कोई भी एक बेटी साथ रहती। रात को साथ वॉक करते। आस-पड़ोस के लोग सेवाभाव की मिसाल देते हुए कहते थे, बेटी हो तो चन्द्रकला जैसी।

बेटियों के लिए संघर्ष करता रहा दामोदर
विकलांग दामोदर को राज्य सरकार से 2 बीघा जमीन मिली और एक पेट्रोल पम्प अलॉट हुआ था। खुद संचालन में अक्षम था तो एक व्यक्ति को दे दिया। उसने अनियमितता की तो जिला रसद अधिकारी ने पम्प का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा कर दी। जांच के बाद जिला कलक्टर ने आदेश दिया कि दोष दामोदर का नहीं है, लाइसेंस बहाल किया जाए। उधर, तेल कम्पनी ने कलक्टर के आदेश से पहले पम्प खारिज कर दिया। ऐसे में दामोदर अपनी बेटियों के भविष्य और न्याय के लिए लड़ रहा था। पिता के इस संघर्ष में बेटियां सहारा बनी हुई थीं। अब परिवार के समक्ष संकट खड़ा हो गया है।