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रीवा। संभाग में आधा दर्जन से अधिक बड़े पुल पच्चीस-पच्चीस साल पुरानी बीयरिंग पर टीके हुए हैं। इन पुलों की बीयरिंग की स्थिति जानने पिछले दो साल से लोक निर्माण सेतु संभाग लगातार मशीन के लिए रूट प्लान भेज रहा है, लेकिन अभी तक यह मशीन उपलब्ध नहीं है। इस मशीन पर बैठ कर पुलों की बीयरिंग जांची जा सकती है। सरकार की यह उदासीनता लोगों को जान पर भारी पड़ सकती है।
30 साल से ज्यादा पुराने है पुल
वर्तमान में संभाग के अंदर ऐसे 100 पुल हैं जो कि पच्चीस साल से अधिक पुराने हैं। इनमें पटेहरा का करिसारी घाट में टमस नदी पर बना पुल सबसे पुराना है। इस पुल की बीयरिंग 30 से भी ज्यादा पुरानी है। इन सभी पुलों की बीयरिंग जांच की आवश्यकता है। इनमें छोटे पुल की बीयरिंग तो मैन्युवल देखी जा सकती है। लेकिन बड़े पुलों की बीयरिंग देखने के लिए लोक निर्माण सेतु संभाग ने मशीन मांगी है।
25 साल होती है लाइफ
बड़े पुलों में स्टील से बनी बीयरिंग की उम्र 25 साल है। 25 साल के बाद यह बीयरिंग कभी भी खराब हो सकती है। बीयरिंग खराब होने पर पुल में वाहनों से चलने में होने वाली हलचल से दरार आ सकती है और पुल टूट भी सकता है।
इन पुलों की होनी है जांच
लोक निर्माण सेतु संभाग ने आधा दर्जन बड़े पुलों की बीयरिंग जांचने की मशीन मांगी है। इनमें में रीवा में सबसे बड़ी कसियारी घाट पटेहरा में टमस नदी में बना पुल, बीहर नदी में बना विक्रम पुल, सलार हनुमान में गोरमा नदी में बना पुल शामिल है। इसके अतिरिक्त सीधी में गौ घाट पटपरा एवं शहडोल का मरीसा घाटा का पुल शामिल है।
यह होती है बीयरिंग
पुल के पावे और आधार के बीच में बीयरिंग लगाई जाती है जिससे पुल पर वाहन चलने के दौरान हलचल का असर नहीं पड़े। इस हलचल को बीयरिंग रोकती है। पुल में लगी इन बीयरिंग को हर पच्चीस साल में बदलने की जरूरत होती है।
Published on:
15 Jan 2018 12:06 pm
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