
wheat export: गेहूं के निर्यात पर लगाम से सस्ता होगा आटा
बाजार भाव महंगा होने के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों ने नाममात्र का गेहूं ही भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) को बेचा, जिसके कारण राज्य भंडारण निगम के गोदामों पर संकट आ गया है। एफसीआइ अब राशन सामग्री वितरण को गेहूं पंजाब, हरियाणा व मध्यप्रदेश से सीधे अपने गोदामों तक लाएगा, जिससे राज्य भंडारण निगम के गोदाम और खाली हो जाएंगे।
राज्य भंडारण निगम (एसडब्ल्यूसी) के गोदामों की भंडारण क्षमता करीब 15 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें से 8 लाख मीट्रिक टन सामग्री के लिए जगह खाली है। अब तक भारतीय खाद्य निगम भी गेहूं रखने के लिए इन गोदामों को किराए पर लेता था, लेकिन इस बार बाजार भाव अधिक होने के कारण किसानों ने एमएसपी पर केवल 8 हजार मीट्रिक टन गेहूं ही बेचा। पिछले साल प्रदेश में एमएसपी पर किसानों ने एफसीआइ को 23.4 लाख मीट्रिक गेहूं बेचा, जिसमें से अब 7 लाख मीट्रिक टन ही बचा है और एमएसपी पर किसानों के गेहूं नहीं बेचने से नई आवक भी नहीं हुई है।
चिंता के कारण
● एफसीआइ राज्य निगम के गोदाम उपयोग करने वाला बड़ा ग्राहक है, वह हाथ खींच रहा है
● किराया बाजार दर से दो—ढाई गुणा अधिक होने से कारोबारी राज्य निगम के गोदाम किराए पर नहीं लेते।
यह करे सरकार
राजस्थान बड़ा मसाला उत्पादक राज्य है। इन फसलों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में लाया जाए। इससे किसानों को उचित मूल्य मिलेगा, वहीं सरकारी गोदामों का अधिक उपयोग हो सकेगा।
81 गोदाम खाली करेगा एफसीआइ
इन परिस्थितियों में एफसीआइ मुख्यालय ने उन गोदामों को खाली करने को कहा है, जिनकी आवश्यकता नहीं है। इससे राज्य भंडारण निगम के 41 गोदाम सहित एफसीआइ 81 गोदाम खाली करेगा। राज्य भंडारण निगम के गोदामों को नेफेड भी किराए पर लेता है, लेकिन के बाजार भाव अधिक होने के कारण किसानों के एमएसपी पर सरसों और मूंगफली नहीं बेचने से नेफेड भी गोदाम किराए पर नहीं ले रहा है।
Published on:
17 Jun 2022 02:35 am
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