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जयपुर. रात केे बारह बजे हो या सुबह के चार, तुरंत वारदात के मौके पर पहुंचती हैं और मामले को सुलझाने में जुट जाती हैं। उनके लिए घर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी से ज्यादा काम महत्व रखता है। यही वजह है कि दोनों पुलिस अधिकारी अन्य महिला पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गईं। पुलिस महकमे में भी आधी आबादी को नेतृत्व का अवसर और काम का श्रेय मिले, इसके लिए पुलिस प्रशासन ने महिला थानों के अलावा दो अन्य थानों में भी महिला थानाधिकारियों को नियुक्ति दी।
श्यामनगर थाने में संतरा मीणा और रामगढ़ थाने में एकता राज बतौर थानाधिकारी तैनात हैं। दोनों ही अपने काम को बखूबी संभाल अन्य थानों के लिए मिशाल कायम कर रही हैं। पुलिस महकमे में महिला कर्मचारी बहुत पहले से हैं, यही नहीं उच्च पदों पर भी महिलाएं तैनात रहीं, मगर बतौर थानाधिकारी तैनाती से कई महिला पुलिसकर्मी डरती रहीं। हालात ये थे कि प्रदेश में स्थित चालीस महिला थानों में भी अधिकतर पुरुष थानाधिकारी तैनात थे।
संतरा और एकता ने यह साबित कर दिखाया है कि वे पुरुष पुलिस अधिकारियों से कम नहीं है। दोनों का कहना है कि पहले जहां महिलाएं थाने आकर शिकायत देने में भी डरती थीं, आज वो बिना झिझक अपनी समस्या खुलकर थानाधिकारी को बताती हैं। इतना ही नहीं जल्द ही समस्या का सामाधान होने से खुश भी हैं।
आधी रात को पकड़े छेड़छाड़ के आरोपित
जब यह जिम्मेदारी मिली तो मुझे एक तरफ खुशी हो रही थी कि मुझे वो मौका मिला है, जो महिलाओं की मजबूती साबित करेगा। वहीं थोड़ी नर्वस भी थी कि अगर मैं कमजोर साबित हुई तो आगे किसी और महिला को यह मौका नहीं मिल पाएगा। खासतौर पर मेरी महिला अपराध पर नजर रहती है। कुछ दिनों पहले की बात है, रात करीब ग्यारह बजे एक लड़की अपने मंगेतर के साथ घर जा रही थी। इतने में पीछे से एक निजी हॉस्टल के लड़कों ने उससे छेड़छाड़ की और मारपीट की। दोनों थाने आए। लड़की रो रही थी, पहले मैंने उसको चुप कराया, फिर जाप्ते के साथ गई और रात को ही उनको हॉस्टल से लाई। जिसके बाद लड़की की आंखों में मुझे जो खुद के लिए विश्वास देखा.. उससे लगा कि मैं किसी पुरुष से कम नहीं हूं।
संतरा मीणा (40), श्याम नगर थानाधिकारी
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छात्राओं की लेती हूं क्लास, महिला को दिलाया न्याय
जब एसपी शंकर दत्त शर्मा ने कहा कि मुझे जमवारामगढ़ थानाधिकारी का पद संभालना है तो मैंने सोच लिया कि सर ने जो विश्वास मुझ पर जताया है, उसे मैं टूटने नहीं दूंगी। मुझे बस यही लगा रहता है कि चाहे जो हो जाए मुझे ये करके दिखाना ही होगा कि महिलाएं पुलिस महकमे में भी बड़ी जिम्मेदारी बखूबी निभा सकती हैं।
नासमझी के चलते नाबालिग छात्राओं के साथ वारदात की घटना अधिक हो रही हैं। ऐसे में स्कूल कॉलेजों में सेमिनार लेती हूं, ताकि छात्राओं के मन से पुलिस का डर निकले। अब छात्राएं उन्हें फोन पर भी अपनी समस्याएं बताती हैं। एक पीडि़त महिला दो साल से थाने के चक्कर काट रही थी। उसका पति कोर्ट पेशी पर नहीं आ रहा था और न ही भरण-पोषण खर्चा दे रहा था। जब वो महिला रोते हुए थाने आई तो, मैंने तुरंत ही जाप्ते को उसके पति की तलाश में लगा दिया। आखिर आरोपित पकड़ा गया और महिला को न्याय मिला।
एकता राज (38 ) रामगढ़ थानाअधिकारी
Published on:
13 Mar 2020 01:03 am
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