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अक्षय चूके, दिल जीतने में सफल नहीं ‘सम्राट…’

फिल्म समीक्षा: सम्राट पृथ्वीराज स्क्रीनप्ले, डायलॉग्स एंड डायरेक्शन: डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदीम्यूजिक: शंकर-एहसान-लॉयस्टार कास्ट: अक्षय कुमार, मानुषी छिल्लर, संजय दत्त, सोनू सूद, मानव विज, आशुतोष राणा, साक्षी तंवर, मनोज जोशीरन टाइम: 135.39 मिनट

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जयपुर

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Aryan Sharma

Jun 04, 2022

अक्षय चूके, दिल जीतने में सफल नहीं 'सम्राट...'

अक्षय चूके, दिल जीतने में सफल नहीं 'सम्राट...'

आर्यन शर्मा @ जयपुर. फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' चंद बरदाई की रचना 'पृथ्वीराज रासो' पर आधारित है। लेखक-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने इस फिल्म के जरिए पृथ्वीराज चौहान के शौर्य और संघर्ष को परदे पर दिखाने की कोशिश की है। इसके साथ ही संयोगिता के साथ उनके प्रेम-विवाह को भी पिरोया है। इतिहास के पन्नों से निकली इस कहानी के निष्पादन में कई खामियां हैं, जिससे यह उतनी असरदार नहीं बन पाई, जिसकी वास्तव में हकदार है। वॉर सीक्वेंस में भी ऐसा कुछ नहीं है, जो इसे अलहदा बनाए। खैर, इक्के-दुक्के दृश्य जरूर उत्साह जगाते हैं।
पृथ्वीराज चौहान के बारे में हमने इतिहास की किताबों में पढ़ा है। फिल्म की कहानी में अजमेर के राजा पृथ्वीराज (अक्षय कुमार) से खफा होकर गजनी का सुल्तान मोहम्मद गौरी (मानव विज) आक्रमण कर देता है। पृथ्वीराज और गौरी की सेना के बीच तराइन की रणभूमि में युद्ध होता है, जिसमें गौरी की शिकस्त होती है। उसे बंदी बना लिया जाता है। हालांकि बाद में पृथ्वीराज उसे रिहा कर देते हैं। उधर, कन्नौज के राजा जयचंद (आशुतोष राणा) की बेटी संयोगिता (मानुषी छिल्लर), पृथ्वीराज पर मोहित है और उन्हें प्रेम करती है...।

सपाट अंदाज में किया पेश
पटकथा की बुनावट में कसावट की कमी खलती है। यह बिखरी हुई सी महसूस होती है। डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने काफी रिसर्च करने का दावा किया है, पर निर्देशन में उतना 'स्पार्क' नजर नहीं आता। पृथ्वीराज की कहानी को जल्दबाजी में पेश किया गया है, जिससे कई पहलू अनसुलझे रह जाते हैं। ऐतिहासिक मूवी के लिहाज से दमदार संवादों की कमी है। बैकग्राउंड स्कोर ठीक है, मगर गीत-संगीत बेदम है। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है।
अक्षय कुमार टाइटल रोल में हैं, पर परदे पर उन्हें देखकर 'सम्राट' जैसी अनुभूति ही नहीं होती। वह इस किरदार के साथ न्याय करने में विफल रहे हैं। पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने अपनी डेब्यू फिल्म में कामचलाऊ परफॉर्मेंस दी है। अधपके चरित्र में संजय दत्त इम्प्रेसिव हैं। सोनू सूद डीसेंट हैं। गौरी की धूर्तता में मानव विज 'सुस्त' हैं। आशुतोष राणा भरोसेमंद हैं। साक्षी तंवर ठीक हैं, वहीं कैमियो में मनोज जोशी प्रभावित करते हैं। लेकिन, इन तीनों को ही प्रॉपर स्क्रीन स्पेस नहीं मिला। फिल्म की कहानी को सपाट अंदाज में पेश किया गया है, जिससे ऐतिहासिक फिल्म के लिहाज से इसमें रोचकता की कमी साफ नजर आती है।

रेटिंग: **