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एनओसी-एनओसी ‘खेल’ रहा निगम, आए दिन हादसे ले रहे लोगों की जान

शहर में कुछ अर्से में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। जांच में पाया गया कि किसी के पास भी फायर एनओसी नहीं थी।

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jaipur hospital

जयपुर अस्पताल में आग के बाद एसएमएस शिफ्ट हुए मरीज की मौत
जयपुर

अपनी लापरवाह कार्यशैली के लिए बदनाम जयपुर नगर निगम में एनओसी के नाम पर 'खेल' किया जा रहा है। शहर में बीते कुछ समय में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। विद्याधर नगर में एक मकान में आग लगने से 5 लोगों की जान गई थी। इसके बाद इंटरटेनमेंट पैराडाइज और मैसूर महल सहित आधा दर्जन आग्निजनित बड़े हादसे हो चुके हैं और अब जयपुर हॉस्पिटल में आग लगने के बाद एसएमएस में इलाज के दौरान एक जने की मौत हो गई है। इन सभी घटनाओं में एक चीज समान है, वो है किसी के पास भी फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं होना। ऐसे में नगर निगम की फायर शाखा सवालों के घेरे में आ गई है। निगम की अग्निशमन शाखा के अधिकारी जयपुर अस्पताल की एनओसी संबंधी दस्तावेज खंगालेंगे।


निगम के निर्देशानुसार भवन में बदलाव का दावा
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हमने एक साल से नगर निगम में फायर एनओसी का आवेदन कर रखा है, लेकिन नगर निगम ने अब तक एनओसी जारी नहीं की है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल भवन 25 साल पुराना है। निगम के निर्देशानुसार इसमें बदलाव करवाए गए थे। इसके बाद ही एनओसी के लिए आवेदन किया था। अस्पताल प्रबंधन वहां पर अग्निशमन उपकरण लगे होने का दावा कर रहा है।

लकवे का इलाज करवाने आए थे, मिली मौत
जानकारी के अनुसार आइसीयू के स्टोर में आग लगने के बाद एक 52 वर्षीय मरीज को एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां देर रात उसकी मौत हो गई। झुंझुनूं के चिड़ावा स्थित वार्ड नंबर 24 निवासी 52 वर्षीय अनिल शर्मा कई दिनों से जयपुर अस्पताल में आइसीयू में भर्ती थे।


50 से ज्यादा मरीज निजी अस्पतालों में
बीती रात अस्पताल की आइसीयू के स्टोर में आग लगने के बाद अनिल शर्मा को एसएमएस अस्पताल लाया गया। जहां उन्हें पहले मेडिसिन वार्ड में भर्ती किया गया, बाद में आइसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान मौत गई। अनिल शर्मा को लकवे की शिकायत के बाद जयपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। वहीं जयपुर अस्पताल से शिफ्ट किए गए 50 से ज्यादा मरीजों का इलाज अन्य निजी अस्पतालों में चल रहा है।

एसएमएस में लापरवाही नहीं : मीणा
एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस मीणा ने बताया कि मरीज को एसएमएस लाया गया था और प्रोटोकॉल के तहत पहले वार्ड में भर्ती किया गया और फिर आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। मरीज के ट्यूब पहले से लगी हुई थी और वार्ड में तैनात चिकित्सकों ने उसका चैकअप किया था। मरीज को संभालने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं हुई है।

अस्पताल के पास एनओसी थी या नहीं इसकी जांच की जाएगी। ये भी जांचेंगे कि यदि एक साल पहले आवेदन किया तो एनओसी क्यों नहीं मिली?

जलज घसिया, फायर ऑफिसर, नगर निगम जयपुर

जयपुर अस्पताल की ओर से एनओसी लेने के लिए एक साल पहले आवेदन किया गया था। निगम ने एनओसी जारी नहीं की, इसमें हमारी कोई गलती नहीं है।
डॉ. शैलेन्द्र, जयपुर अस्पताल