
फायरफाइटर्स की जान बचाएगा 'सेंसरअप'
उत्तरी अमरीका के वैज्ञानिक एक नई तकनीक की टेस्टिंग कर रहे हैं, जो कि आग के दौरान बहादुरी से लोगों की जान बचाने वाले फायरफाइटर्स की मदद करेगी। इस तकनीक को सेंसरअप नाम दिया गया है। सेंसरअप को लगाने की स्थिति में अन्य टीम के सदस्यों के लिए यह जान पाना संभव होगा कि आग लगने के दौरान फायरफाइटर की सटीक लोकेशन क्या है। साथ ही उन्हें यह भी पता चल पाएगा कि वे उस समय किस तरह के वातावरण में सांस ले रहे हैं यानी कि वहां पर किस गैस का एक्सपोजर ज्यादा है। वैंकूवर फायर डिप्टी चीफ टायलर मूर के अनुसार इस उपकरण से पता चलेगा कि फायरफाइटर वर्तमान में किस गैस की चपेट में है क्योंकि अग्निशामकों की मौत का एक प्रमुख कारण कैंसर है। मूर के अनुसार वर्तमान में उनके विभाग के एक सदस्य अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहे हैं, जो कि फायरफाइटर के रूप में उनके काम का परिणाम है। मूर का कहना है कि आग लगने के दौरान कोई भी फायरफाइटर कार्सिनोजेन्स के संपर्क में आ सकता है, ऐसे में मैं उम्मीद करता हूं कि हर किसी के पास ये सेंसर होंं। मूरे के अनुसार यह उपकरण महत्वपूर्ण संकेतों को भी महसूस करता है, जैसे कि जीवन के लिए हृदय की स्थिति आदि। इससे फायरफाइटर्स के संबंध में न केवल तात्कालिक समस्या का पता चलता है बल्कि दीर्घकालिक आशंकाओं का भी अनुमान लगाया जा सकता है। मूरे के अनुसार यह एक उभरती हुई तकनीक है, जो कि फायरफाइटर्स के लिए उपयोगी साबित होगी। इस उपरकण का परिक्षण एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। फायरफाइटर्स के लिए इसका प्रयोग आने वाले छह महीनों से लेकर एक साल के भीतर तक शुरू होने की उम्मीद है। फायरफाइटर्स के लिए उपकरण का इस्तेमाल इस बात पर भी निर्भर करेगा कि स्थानीय प्रशासन इसके लिए कितना बजट तय करता है।
Published on:
31 Oct 2019 07:53 am
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