
सभी मंदिर पूजा के लिए वेदों के मंत्रों का उपयोग करते हैं। वेद ऋचाओं के बिना मंदिर नहीं हो सकते, ऐसी भावना के साथ प्रतिमाओं के स्थान पर वेदो को प्रमुखता से दर्शाने वाला एक मंदिर जल्द ही तमिलनाडु के कोझिकोड़ में आकार लेगा। कश्यप वेद अनुसंधान केंद्र के अनुसार मंदिर संभवत: इस महीने के अंत तक देखने को मिल सकता है। वहीं, केंद्र के अधिकारियों का यह भी दावा है कि यह देश में वेदों का पहला मंदिर होगा।
लोगों को वेदों की ओर करेगा आकर्षित:
कश्यम आश्रम के संस्थापक और वेद अनुरागी आचार्य एमआर रमेश के अनुसार मंदिर का विचार जैसा कि हम अब समझते हैं, वेदों में नहीं है। यह एक नई अवधारणा है जिसे तंत्र शास्त्र की पुस्तकों में नहीं देखा जा सकता है। वेद शब्द का अर्थ है ज्ञान, जो किसी वर्ग तक सीमित न हो। वेदों का मंदिर लोगों का ध्यान वेदों की ओर मोड़ने के लिए बनाया जा रहा है।
वेदों में समेटा गया है ज्ञान:
विद्वानों के अनुसार वैदिक ग्रंथ मूलत: मौखिक थे व संस्कृत भाषा में रचे गए। काफी समय तक श्रुति परंपरा में रहने के पश्चात् इन्हें कलमबद्ध किया गया है। चारों वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन है तथा अथर्ववेद सबसे नवीन है। ऋग्वेद मंत्रों का संकलन है जिसे यज्ञों के अवसर पर देवताओं की स्तुति के लिये ऋषियों द्वारा संगृहीत किया गया था। ऋग्वेद के कुल मंत्रों की संख्या 10 हजार से अधिक है। यजुर्वेद ऐसे मंत्रों का संग्रह है जिनसे पुरोहित द्वारा यज्ञ विधि को संपन्न कराया जाता था। कर्मकांड प्रधान यजुर्वेद को मंत्रों की प्रकृति के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया जाता है- शुक्ल यजुर्वेद तथा कृष्ण यजुर्वेद। सामवेद, ऋग्वेद से लिये गए एक खास प्रकार के स्तुति पद्यों का संग्रह मात्र है जिसे लय में ढाल दिया गया है। अंतिम वेद अथर्ववेद है जिसमें लौकिक फल देने वाले कर्मकांड तथा जादू-टोना-टोटका और इंद्र मायाजाल से संबंधित मंत्रों की उपस्थिति है।
यह भी पढ़ें:
Published on:
11 Jan 2023 02:23 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
